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Sunday, February 19, 2012

UPTET Allahabad Highcourt : Candidate Who Passed TET After Scrutiny of Result, But Submitted PRT Application Late due to Late Declaration of Result

UPTET Allahabad Highcourt : Candidate Who Passed TET After Scrutiny of Result, But Submitted PRT Application Late due to Late Declaration of Result

Allahabad Highcourt Directed to Accept This Application

See Case Details :-

HIGH COURT OF JUDICATURE AT ALLAHABAD, LUCKNOW BENCH
?Court No. - 6

Case :- MISC. SINGLE No. - 611 of 2012

Petitioner :- Shama Afroz
Respondent :- The State Of U.P. Through Secretary Basic Education &Another
Petitioner Counsel :- Vivek Kumar Mishra,Sachchidanand
Respondent Counsel :- C.S.C.

Hon'ble Shabihul Hasnain,J.
Heard Sri Vivek Kumar Mishra, learned counsel for the petitioner and learned Additional Chief Standing counsel for the State.
The petitioner had appeared in Teachers' Eligibility Test. The result of the test was declared on 25.11.2011. Petitioner was declared failed. There was a provision for scrutiny. The petitioner applied for the same. As a result of the scrutiny, the petitioner was declared passed on 11.1.2012. Meanwhile, the candidates who were declared passed in the earlier results, were required to apply for appointment on the post of Assistant Teacher� latest by 9.1.2012. It is very obvious that the last date for applying for appointment is two days earlier to the date of declaration of the result of scrutiny. The petitioner applied for appointemnt only after the declaration of the result on 11.1.2012. She applied on 13.1.2012 but her case has been rejected on the ground that the application is delayed. Prima facie this argument and the reasoning of the opposite parties is fallacious and arbitrary. Scrutiny means correction of mistake on the part of the examining body itself. There is no fault of the candidate in any manner. If the calculation has not been done by the examiner correctly, the candidate can not be made to suffer in any manner.




In the present case, the petitioner has been declared passed after scrutiny. It means that the examining body or the examiner was at fault. The petitioner can not be penalized for the fault of the examining body or the examiner. In all fairness, the date for sending the application for appointment on the post of Assistant Teacher should have been latter than the date of declaration of the scrutiny result. The petitioner after receiving the result of the scrutiny has promptly applied within two days. The case has been arbitrarily rejected.
Since the dates are accepted by the opposite parties, there is nothing in the controversy which requires any counter affidavit. It can be decided here and now on the basis of available material.
Accordingly, the petition is disposed of with the direction that the opposite parties will consider the case of the petitioner in the light of the observations of this Court and consider her case and accept the application of the petitioner as though it was within time and take appropriate decision with regard to the petitioner in accordance with the merits of the case.
Order Date :- 30.1.2012
RKM.


Source : http://elegalix.allahabadhighcourt.in/elegalix/WebShowJudgment.do?judgmentID=1657294




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5 comments:

Rajesh Row Alld. said...

कोर्ट सं. - 6

प्रकरण: Misc. एकमात्र सं - 611 2012

याचिकाकर्ता: शमा अफरोज
प्रतिवादी: - उत्तर प्रदेश के राज्य सचिव बेसिक शिक्षा एवं अन्य के माध्यम से
याचिकाकर्ता वकील: - विवेक कुमार मिश्रा, Sachchidanand
प्रतिवादी वकील: C.S.C.

माननीय Shabihul हसनैन, जे.
श्री विवेक कुमार मिश्रा सुना है, याचिकाकर्ता के वकील सीखा है और राज्य के लिए अपर मुख्य स्थायी वकील सीखा.
याचिकाकर्ता शिक्षक पात्रता परीक्षा में दिखाई दिया था. 2011/11/25 पर परीक्षण के परिणाम घोषित किया गया था. याचिकाकर्ता में विफल रहा घोषित किया गया था. जांच के लिए एक प्रावधान था. याचिकाकर्ता उसी के लिए लागू. जांच का एक परिणाम के रूप में, याचिकाकर्ता 2012/11/01 पर पारित घोषित किया गया था. इस बीच, उम्मीदवारों जो पहले परिणाम में पारित घोषित किया गया, सहायक शिक्षक के पद पर नियुक्ति के लिए 2012/01/09 द्वारा नवीनतम लागू करने के लिए आवश्यक थे. यह बहुत स्पष्ट है कि नियुक्ति के लिए आवेदन करने की अंतिम तारीख जांच के परिणाम की घोषणा की तारीख से दो दिन पहले है. याचिकाकर्ता केवल appointemnt के लिए 2012/01/11 पर परिणाम की घोषणा के बाद लागू होता है. वह 2012/01/13 पर आवेदन किया है लेकिन जमीन पर उसके मामले को खारिज कर दिया गया है कि आवेदन देरी हो रही है. प्रथम दृष्टया इस तर्क को और विपरीत दलों का तर्क ग़लत और मनमाना है. संवीक्षा की जांच शरीर अपने आप के हिस्से पर गलती के सुधार का मतलब है. वहाँ किसी भी तरीके से उम्मीदवार की कोई गलती नहीं है. यदि गणना परीक्षक द्वारा नहीं किया गया है सही ढंग से किया, उम्मीदवार किसी भी रूप में भुगतना नहीं किया जा सकता है.


वर्तमान मामले में, याचिकाकर्ता घोषित किया गया है, जांच के बाद पारित कर दिया. इसका मतलब यह है कि जांच शरीर या परीक्षक गलती पर था. याचिकाकर्ता की जांच शरीर या परीक्षक की गलती के लिए सज़ा नहीं किया जा सकता है. सब निष्पक्षता में, सहायक शिक्षक के पद पर नियुक्ति के लिए आवेदन भेजने के लिए तिथि जांच के परिणाम की घोषणा की तारीख से उत्तरार्द्ध किया गया है चाहिए. जांच के परिणाम प्राप्त करने के बाद याचिकाकर्ता तुरंत दो दिनों के भीतर लागू किया गया है. मामले मनमाने ढंग से अस्वीकार कर दिया गया है.
चूंकि दिनांक विपरीत पक्षों द्वारा स्वीकार किए जाते हैं, वहाँ विवाद में कुछ भी नहीं है जो किसी भी काउंटर शपथ पत्र की आवश्यकता है. यह उपलब्ध सामग्री के आधार पर यहाँ और अब यह फैसला कर सकते हैं.
तदनुसार, याचिका की दिशा के साथ निपटाया है कि इस न्यायालय की टिप्पणियों के प्रकाश में विपरीत दलों याचिकाकर्ता के मामले पर विचार और उसके मामले पर विचार और याचिकाकर्ता के आवेदन को स्वीकार करेगा के रूप में यद्यपि यह समय के भीतर और उचित लेने के मामले के गुण के अनुसार में याचिकाकर्ता के संबंध में निर्णय.
आदेश दिनांक: 2012/01/30

Saleem said...

Uptet ko kamyabi dilane k liye hume media ko sath lena hoga media tabhi saath hogi jab use lagega k pradarshan se darshak badhenge
so be unite

. said...

Hamare Neta ji-

नई दिल्ली। नेता जब मंत्री बनते हैंतो कसम खाते हैं कि लोगों की सेवा करेंगे। लेकिन अक्सर वो लोगों की गाढ़ी कमाई से खुद की सेवा करने लग जाते हैं। लोकायुक्त जांच में फंसे उत्तर प्रदेश के उर्जा मंत्री रामवीर उपाध्याय को गाड़ियों का कुछ खास शौक है। उन्होनें एक, दो नहीं कुल23 सरकारी गाड़ियां अपनी सेवा में ले रखी हैं।
उत्तर प्रदेश के उर्जा मंत्री रामवीर उपाध्याय इन दिनों चुनाव प्रचार में लगे हैं। चुनाव प्रचार न भी हो तो भी रामवीर उपाध्याय की सेवा में सरकारी गाड़ियों की लाइन लगी होती है। उर्जा मंत्री की आवभगत में मंत्रालय के तहत आने वाले आठ बिजली निगम लगे हुए हैं। जिस मंत्री को सरकारी तौर पर सिर्फ एक गाड़ी दी जानी चाहिए उसे गाड़ियां का कुनबा देदिया गया। सूचना के अधिकार के तहत निकले इन कागजातों के मुताबिक मंत्री रामवीर उपाध्याय के लिए यू पीपॉवर कॉरपोरेशन लिमिटेड ने जनवरी 2008 से अक्टूबर 2008 के बीच 8 गाड़ियां खरीदीं। जिसमें पांच टाटा सफारी, एक जिप्सी और 2 एंबैसडर कारें शामिल हैं।
लेकिन 8 गाड़ियों में भी शायद मंत्रीजी का काम नहीं चला सो पॉवर निगम के तहत आने वाली कंपनी दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम की ओर से 8 और गाड़ियां रामवीर उपाध्याय के नाम दी गईं। यानी मंत्री जी को कुल 16 गाड़ियां मिल गईं। लेकिन हैरानी तब हुई जब उनके लिए 7 और गाड़ियां मुहैया करवा दी गईं। यानी एक मंत्री के लिए कुल 8+8+7 = 23 सरकारी गाड़ियां दौड़ रही हैं। मंत्री जी पत्नी सीमा उपाध्याय फतेहपुर सीकरी से लोकसभा सांसद हैं।
अकेले मंत्रीजी 23 गाड़ियों पर कुंडली मार कर बैठे हों तो अंदाजा लगाइए कि उनके रख-रखाव और सजावट में क्या खर्चा आता होगा। उर्जा विभाग औरविद्युत निगमों के रिकॉर्ड बताते हैं कि हर महीने मंत्रीजी के सेवा में लगे गाड़ियों का बिल लाखों में आता है। अंदाजा लगया जा सकता है कि आखिर इस देश में सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों का बुरा हाल क्यों है।
ऐसे में सवाल ये है कि रामवीर उपाध्याय मंत्री हैं, उन्हें दौरे करने के लिए गाड़ी तो चाहिए। लेकिन आखिर कितनी गाड़ियां उन्हें दी जा सकती हैं? राज्य सरकार के सरकारी आदेश के मुताबिक किसी कैबिनेट या राज्य मंत्री को एक गाड़ी से ज्यादा नहीं दी जा सकती, राजधानी के भीतर दौरे के लिए महीने में 125 लीटर पेट्रोल का इस्तेमाल किया जा सकता है। लेकिन रामवीर उपाध्याय से जुड़े रिकॉर्ड उत्तर प्रदेश सरकार के नियमों को तार-तार करते हैं।
सरकारी रिकॉर्ड जो भी कहें, कागजों पर भले ही माया के मंत्री रामवीर उपाध्याय के पास 23 गाड़ियां हों लेकिन वो खुद को पाक-साफ बताते हैं।
उत्तर प्रदेश के लोकायुक्त पहले से ही मंत्री रामवीर उपाध्याय के खिलाफ भ्रष्टाचार से जुड़े कई गंभीर मामलों की जांच कर रहे हैं। यहां सवाल नियमों का भी है और नैतिकता का भी है।
नियम एक गाड़ी का है तो फिर आखिर उत्तर प्रदेश के ऊर्जा मंत्री 23 सरकारी गाड़ियों का रुतबा कैसे रख रहे हैं। अगर ये नियमों की अवहेलना है तो क्या चुनाव से पहले तमाम दागी मंत्रियों को बाहर का रास्ता दिखाने वाली माया सरकार उनके खिलाफ भी कोई कार्रवाई करेंगी। अगर 23 सरकारी गाड़ियों का इस्तेमाल मंत्री जी या उनके परिवार का कोई सदस्य भी कर रहा है तो क्या नैतिकता के तौर पर मंत्री जी को ये गाड़ियां तत्काल वापस नहीं कर देनी चाहिए। आखिर सरकारी खर्चे परएक मंत्री के पास इतनी गाड़ियों का काफिला क्यों हो। क्या ये जनता के पैसे की बर्बादी नहीं है।
- IBN7

Rajesh Row Alld. said...

Saleem Ji, aap sahi kar rahe hai Ab humko media ke madhyam se bhe apni awaj buland karni hogi.......
Hamari ek Friends Rasid Azad ji ne media ke madhyam se sabhi bhainyo ko sabhi news chanel ko contact no. bhi provide karwaya tha and live programe me bhi bhag lene ke liye prarit karte the.

Unknown said...

abe kyo lad rahe ho?jis par bhi selection hona hoga ho jayega.. Apas me ladkar mat maro..
Amit Jaiswal
lakhimpur uptet morcha adyach
mob-8423431789