/* remove this */ Blogger Widgets /* remove this */

Thursday, May 3, 2012

UPTET : Article of Shyam Dev Mishra


UPTET : Article of Shyam Dev Mishra Regarding DECISION OF ALLAHABAD HIGHCOURT ON WRIT-A NO. 76039/2011 ON 02.05.2012

प्रेषक: Shyam Dev Mishra <shyamdevmishra@gmail.com>
दिनांक: मई 2012 2:01 pm
विषय: NEW ARTICLE ON DECISION OF ALLAHABAD HIGHCOURT ON WRIT-A NO. 76039/2011 ON 02.05.2012
प्रति: Muskan India <muskan24by7@gmail.com>


Please publish the matter on blog so that candidates can understand the situation on the WRIT-A No. 76039/2011 and can decide their next move.

Thanks.

मित्रों! घबराएँ नहींसुबह होने वाली है!


(अगर कुछ मित्रों को लगता है कि मैं केवल उन्हें झूठा दिलासा देने के लिए कुछ न कुछ लिखता रहता हूँ तो कृपया अपने विचार जरुर लिखे. वैसे मेरा मानना है कि यदि किसी भी व्यक्तिवस्तु या विषय के सकारात्मक पक्ष ज्यादा मजबूत दिखें तो यह तय हो जाता है कि उसके नकारात्मक पक्षों पर विजय पाई जा सकती है. चूंकि नकारात्मक पक्ष दिखने वालो की कमी आज संसार में नहीं है इसलिए मै आपको सकारात्मक पक्ष दिखाने का प्रयास करता रहता हूँ. )

मित्रों आज आपके लिए ज्यादा कुछ तो नहीं पर जरा सी बातजो कल अदालती कार्यवाही के बाद मिली ख़बरों के बाद मुझे समझ में आ रही हैआपसे बताना चाहता हूँ ताकि आपके मन में छाया निराशा का अँधेरा कुछ कम हो सके. आज तक टी.ई.टी.उत्तीर्ण अभ्यर्थियों के साथ जो कुछ होता आया है और हो रहा है वह निहायत दुर्भाग्यपूर्ण रहा है पर कल के अदालत के निर्णय से लग रहा है कि भर्तियाँ अब शुरू होंगी और इस बार जब प्रक्रिया शुरू होगी तो उसमे कोई रुकावट नहीं आएगी. माना कि हम सभी को बहुत ख़ुशी होती अगर न्यायालय विज्ञापन पर से रोक हटा लेता या अदालत द्वारा रद्द किये जाने की दशा में सरकार संशोधित विज्ञापन निकलती और भर्ती प्रक्रिया शुरू होती. पर यह अच्छा हुआ कि कल न्यायालय ने एक ऐसा फैसला नहीं किया जिसके खिलाफ निश्चित
तौर पे बी.टी.सी./विशिष्ट बी.टी.सी. वाले अभ्यर्थी पुनः कोर्ट जाते और मामला फिर लटक जाता. न्यायालय ने मामले को गंभीरता से लेते हुए इस सारे प्रकरण से सम्बंधित सभी पक्षों की आपत्तियों को ध्यान में रखकर राज्य सरकार से हलफनामा माँगा है ताकि भर्ती से सम्बंधित सभी प्रश्नों का
समाधान इसी केस के निर्णय द्वारा हो जाये और प्रक्रिया एक बार शुरू होने के बाद निर्विवाद और निर्विरोध पूरी हो.

ध्यान दें कि यह विज्ञापन "प्राइमरी शिक्षकों" की भर्ती का नहींबल्कि "प्रशिक्षु प्राइमरी शिक्षकों" (एन.सी.टी.ई. के नियमानुसार अध्यापक के रूप में नियुक्त ऐसे बी.एड.योग्यताधारक जिन्हें नियुक्ति के उपरांत माह का विशेष प्रशिक्षण करना अनिवार्य है) की भर्ती के लिए जारी किया गया था
क्यूंकि उसे जारी करते समय सरकार/बेसिक शिक्षा विभाग का ध्यान उन लगभग से हज़ार बी.टी.सी./विशिष्ट बी.टी.सी. अभ्यर्थियों की तरफ नहीं गया जिन्हें एन.सी.टी.ई. के नियमानुसार कोई विशेष प्रशिक्षण प्राप्त करने की आवश्यकता नहीं है. ऐसे में ये उम्मीद करना कि बी.टी.सी./विशिष्ट
बी.टी.सी. वाले अभ्यर्थी गैरजरूरी ट्रेनिंग करेंगे और सहायक अध्यापक के वेतनमान के बदले महीने तक प्रशिक्षु अध्यापक का वेतनमान स्वीकार करने को राजी होंगेहास्यास्पद है. जाहिर हैये सवाल उठाना ही था और इसका हल किये बिना प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकती थी और अच्छा हुआकि समय रहते यह सवाल उठा और वर्तमान केस के साथ इसका भी समाधान हो रहा है. यहाँ ये भी स्पष्ट करना जरुरी है कि बी.टी.सी./विशिष्ट बी.टी.सी. वाले टी.ई.टी. उत्तीर्ण अभ्यर्थी और बी.एड.डिग्रीधारक अन्य अभ्यर्थी में सिर्फ इतना फर्क होगा कि उन्हें ट्रेनिंग नहीं करनी होगी और उनकी नियुक्ति
"प्रशिक्षु प्राइमरी शिक्षकों" के तौर पर नहीं, "सहायक अध्यापक" के तौर पे होगी.

अच्छी बात तो ये हुई कि विज्ञापन और अब तक घोषित सरकारी नीति के अनुसार चयन की मेरिट टी.ई.टी. के आधार पर बनेगी. और बी.टी.सी./विशिष्ट बी.टी.सी. वाले टी.ई.टी. उत्तीर्ण अभ्यर्थी और बी.एड.डिग्रीधारक अन्य अभ्यर्थियों की संयुक्त मेरिट बनाने को लेकर कोई समस्या नहीं आएगी क्यूंकि अगर मेरिट अकादमिक के आधार पे बनती तो बी.एड. और बी.टी.सी./विशिष्ट बी.टी.सी.
प्राप्तांको को मिलने वाले वेटेज को लेकर नया पेंच पैदा हो सकता था और दोनों की अलग-अलग मेरिटलिस्ट बनने की दशा में 72825 रिक्तियों में किसको प्राथमिकता दी जायेये सवाल खड़ा होतापर सिर्फ टी.ई.टी.मेरिट के आधार पर चयन होने से किसी विवाद की सम्भावना नहीं रहेगी. इन 72825 रिक्तियों के लिए टी.ई.टी. मेरिट के आधार पर बी.एड. और बी.टी.सी./विशिष्ट बी.टी.सी.
वाले अभ्यर्थियों की संयुक्त मेरिट लिस्ट बनाकर चयन होगा. ऐसे में अब स्पष्ट हो रहा है कि टी.ई.टी. द्वारा चयन से एक और प्रश्न खुद ब खुद हल हो जाता है. मेरिट के आधार पर मचे बवाल के बारे में मेरा कहना है कि वास्तव में अब तक तो टी.ई.टी. मेरिट बनाम अकादमिक मेरिट की बातें सिर्फ फर्जी पत्रकारोंसरकारी दफ्तरों के जूनियर क्लर्क और चपरासियों की गप्पों से उडी अफवाह मात्र है जिसे अकादमिक समर्थको ने अपने मन की तसल्ली के लिए बढ़ा-चढ़ा कर पेश किया है और सशंकित टी.ई.टी. मेरिट-समर्थकों ने बराबर प्रत्युत्तर देकर इस आग को भड़काया है. भला कोई भी बता सकता है कि कब मुख्यमंत्रीबेसिक शिक्षा मंत्रीबेसिक शिक्षा सचिव या निदेशक ने मेरिट के आधार की बात अधिकृत रूप से की है 

ये तो वही बात हुई कि सिर्फ 'कौवा कान ले गया!" सुनकर सब कौवे के पीछे भागे पर अपना कान किसी ने छूकर नहीं देखा.

यह भी बतलाना चाहूँगा कि हो सकता है कि अदालत कपिल देव यादव की नीयत को जानकर भी विज्ञापन को निरस्त करने को नियम-विरुद्ध होने के कारणयानि बी.एस.ए. की जगह माध्यमिक शिक्षा परिषद् के सचिव द्वारा निकले जाने के कारणमजबूर हो क्यूंकि कानून सिर्फ नियमों के आधार पर फैसला करती है.
पर विज्ञापन रद्द होने की दशा में भी शिक्षा के अधिकार अधिनियम, 2010 की शर्तें पूरी करने के लिए राज्य सरकार द्वारा भर्ती की ही जानी है अन्यथा उसे न सिर्फ केंद्र से मिलने वाली सहायता पर रोक लगेगी और राज्य यह बोझ नहीं उठा सकता बल्कि शिक्षा का अधिकार अधिनियम के अंतर्गत उत्तर प्रदेश अपनी नियमावली बनाकर अधिसूचित भी कर चुका है और छात्र-शिक्षक अनुपात पूरा
करने के लिए भर्ती करने को संवैधानिक रूप से बाध्य है. ऐसा न करने पर किसी व्यक्ति द्वारा जनहित याचिका दायर करने की दशा में अदालत सरकार से जवाब-तलब कर सकती हैभर्ती के लिए तय नीति और उठाये गए क़दमों का ब्यौरा मांग सकती है और उसे निर्देश भी दे सकती है. केंद्र सरकार द्वारा भी अध्यापकों की नियुक्ति को लेकर राज्य पर दबाव है क्यूंकि राज्य केंद्र से
इन भर्तियों से बढ़ने वाले वित्तीय खर्च का 65 % अंशदान ले चुका है. अतः विज्ञापन रद्द होने की स्थिति में भी सरकार मजबूर होगी कि अपनी भूल सुधारते हुए नया विज्ञापन निकाले.

पर एक बात ध्यान जरुरी है कपिल जैसे अड़ंगेबाजों द्वारा को ध्यान में रखते हुए लग रहा है कि अब न्यायालय चाहे कोई भी फैसला देबी.एड. डिग्री-धारकों की प्राइमरी टीचरों के रूप में नियुक्ति तभी संभव है जब केंद्र सरकार राज्य सरकार के अनुरोध पर समयसीमा बढ़ा दे. हाईकोर्ट ने भी
बी.टी.सी.+टी.ई.टी. उत्तीर्ण आवेदकों पर पहले विचार करने यानि उनसे भर्ती पूरी करने की बात कही है तो उसका कारण एन.सी.टी.ई. द्वारा बी.एड. डिग्री-धारकों की प्राइमरी टीचर के तौर पे नियुक्ति के लिए दी गई समय सीमा, 01.01.2012 तक नियुक्ति न हो पाना हो सकता है. ऐसी स्थिति में भी
राज्य-सरकार सिर्फ बी.टी.सी.+टी.ई.टी. उत्तीर्ण आवेदकों के द्वारा भर्ती पूरी करने का कदम इसलिए नहीं उठा सकती क्यूंकि सबको पता है कि राज्य में शिक्षकों की आवश्यकता को पूरा करने के लिए पर्याप्त संख्या में ऐसे बी.टी.सी. उत्तीर्ण अभ्यर्थी हैं ही नहीं जिन्होंने टी.ई.टी. उत्तीर्ण किया हो. पर एन.सी.टी.ई. की ख़त्म हो चुकी समय सीमा के आधार पर एक मजबूत अडंगा लगाया जा सकता है. राज्य सरकार के लिए भी यहाँ केवल 72825 भर्तियों की बात सोचना अदूरदर्शिता होगी क्यूंकि प्राइमरी शिक्षकों की मौजूदा आवश्यकताजो लगभग लाख हैको देखते हुए यह विचार भी जरुरी है
कि एक बार अगर राज्य-सरकार ने बी.एड.डिग्री-धारकों को दरकिनार करते हुए केंद्र से अनुरोध करके उपरोक्त समय-सीमा बढवाने के बजाय फ़िलहाल ये 72825 भर्तिया बी.टी.सी.+टी.ई.टी. अभ्यर्थियों से भर ली तो आगे भी अध्यापकों के पद सालों तक खाली पड़े रहेंगे क्यूंकि इतने बी.टी.सी.+टी.ई.टी. उत्तीर्ण अभ्यर्थी न तो अभी प्रदेश में हैं न ही हर साल तैयार होने वाले लगभग
20000 बी.टी.सी. उत्तीर्ण अभ्यर्थी टी.ई.टी. में उत्तीर्ण ही हो जायेंगेइस बात की कोई गारंटी नहीं है. ऐसे में प्रदेश आने वाले कई सालों तक शिक्षकों की भरी कमी से जूझेगाप्रदेश के नौनिहाल मास्टर-जी की राह देखेंगे और शिक्षा का अधिकार अधिनियम के उद्देश्य खाक में मिल जायेंगे.

ऐसी स्थिति में पहले तो बी.टी.सी.+टी.ई.टी. उत्तीर्ण अभ्यर्थियों पर पहले विचार करने का कोर्ट का सुझाव राज्य-सरकार के लिए कतई व्यावहारिक नहीं होगा. जज महोदय ने जो कमेन्ट किया है वो आज की स्थिति के कानूनी पहलुओं को ध्यान में रखकर कहा हैपर सरकार को प्रदेश चलाने के लिए अपने विवेक का भी इस्तेमाल करना है. अगर आज प्रदेश सरकार ने दूरदर्शिता का परिचय
देते हुए अगर समय रहते केंद्र से समयसीमा बढवा ली होतीजो की उसे वैसे भी करवानी ही पड़ेगीतो कोर्ट ऐसा नहीं कहता. मौजूदा स्थिति में जज महोदय कानून के अंतर्गत ही बात कर सकते हैं और एन.सी.टी.ई. के नियम के विपरीत 01.01.2012 के बाद प्राइमरी टीचर के तौर पे बी.एड. डिग्रीधारकों की नियुक्ति को चुनौती दिए जाने को गलत नहीं ठहरा सकते. पर आनेवाले कल के
मद्देनज़र न सिर्फ राज्य सरकार की मज़बूरी है कि वास्तविक स्थिति को नकारने की जगह उसे स्वीकारते हुए केंद्र से समयसीमा बढाने का अनुरोध करे बल्कि शिक्षा के अधिकार का अधिनियम उत्तर प्रदेश जैसे बड़े और महत्वपूर्ण राज्य में सफलता पूर्वक लागू करने के लिए केंद्र सरकार और एन.सी.टी.ई. को भी समयसीमा बढाने की अनुमति देनी ही पड़ेगी.

अतः आप मित्रों से निवेदन है कि जहाँ आपने इतना धैर्य रखा हैथोडा और रखेइतनी बाधाएँ झेली हैं तो जो बाधाएँ आगे आ सकती हैंउनसे भी निपटकर ही आगे बढ़ेंताकि सीधे मंजिल पर ही जा कर रुकें.

पर ये भी ध्यान रखें कि ये बातें सच होते हुए भी तबतक बेमानी हैं जबतक इन्हें कोर्ट के सामने न रखा जाये. इसलिए टी.ई.टी. के नेताओं से पुनः अनुरोध है कि कृपया इन भर्तियों पर आस लगाये बैठे लाखों अभ्यर्थियों की भावनाओं का ध्यान रखते हुए उन्हें सच-सच बताएं की क्या हम इस केस में थर्ड पार्टी हैं कि नहीं. आप सब जानते हैं कि अब तो कितनी याचिकाएं इस याचिका से जुडी हैंफिर हम पार्टी क्यूँ नहीं बनेअगर हम पार्टी नहीं बने तो हमारा पक्षजिनमे से कुछ का जिक्र अपनी छोटी सी बुद्धि के अनुसार ऊपर किया हैकौन रखेगा क्यूंकि अन्य पक्ष तो कोर्ट में अपनी अपनी बात कहेंगे और कोर्ट वही सुनेगा जो उस से कहा जायेगा. कृपया इन नेताओं को जानने वालों से भी अनुरोध है की वो इनसे ब्लॉग पर आकर स्थिति स्पष्ट करने और जरुरी कदम उठाने या फिर सीधे-सीधे इंकार करने को कहें ताकि बाकि लोग इनका भरोसा छोड़कर अपने हिसाब से कदम उठाये. मेरी बात से किसी को ठेस पहुचे तो कृपया क्षमा करें क्यूंकि मेरा इरादा किसी पर आरोप लगाना नहीं
सिर्फ आपको स्थिति से अवगत कराना है ताकि आप समय रहते क़दम उठा सकें..
धन्यवाद!!

आपका
श्याम देव मिश्रा
मुंबई

37 comments:

  1. shyam dev ji
    thanks for this article.........
    ratnesh tripathi

    ReplyDelete
  2. muskan ji
    pls. un logo ka margadarsan kare jinhone bhol bas omr par fluid/blade laga diya hai. ye sabh logis samay manasik roop se paresan hai kahi ye log kuch galat kadam na utha le anytha tet mritako me kuchh aur naam na juda jaye.isliye pls. inko akela na chhode kyki ye sabhi logo ne ham logo ka har kadam par sath diya hai. atah is bipati me hame unka sath dena chahiye

    ReplyDelete
  3. Thanks shyam dev!
    Kuch log apko leader banane ke bat kah rahe hai mai bhi samrathan karta hu.Sabhi tetien ka hausla tutata ja raha hai.Samay lamba ho jane se sab hatash ho chuke hai.

    ReplyDelete
  4. agar jaldabaji me ya arabadi me kiya gaya faisala bharati par prashna chinha laga sakata hai
    gov. ne abhi tak kucha bhi nahi statement diya hai isliye hai tauba machane ki jaroot nahi hai
    lekin gov. par dabav banaye rakhana hai bas 1 mah aur bas........... dhiraj rakhana padega

    ..ratnesh tripathi

    ReplyDelete
  5. tet merit jindabad.......
    jit hamari hi hogi

    ReplyDelete
  6. Thanks Shyam dev ji.dil me santi meli.

    ReplyDelete
  7. ap ek bat ka ans dein jb court ko itni choti si bat pr decision dene me 4 month lg skte hain then how can u think 11 din me decision de dega??

    ReplyDelete
  8. Shyam dev ji aapka article read karke Dil ko sukun mila Thank. ab lagta hum logo ka sach me time aa gaya.
    ek kahawat hai ki bhagwan ke ghar mei der hai ander nahi.

    ReplyDelete
  9. Shyam dev ji aapko kya lagta 15 May ko final result aa jayega.

    ReplyDelete
  10. Mahesh g
    apki kahawat bhagwan ke ghar mei der hai ander nahi.aaj kal kitabo main acchi lagti ha ya baccho ko padane main acchi lagti ha iska real life main sirf man ko samzhane wali baat ha
    thankx

    ReplyDelete
  11. An "Excellent" article is given by SHYAM DEV JI.THANKS SIR JI.

    ReplyDelete
  12. abhi tak ye nahi bataya gaya ki kal third party ka kya roll tha aur nahi to kyun nahi (please tet leaders ya unke pratinidhi jo blog par active hai ke dawara spasht kiya jaye)

    ReplyDelete
  13. this article is verry good for tetions.

    ReplyDelete
  14. dear sd mihra ji,
    lot of thanks for this artical..aapke articals se hum sabko bahut rahat aur margdarshan milta hai bahi..isse kehte hain +ve thinking.

    ReplyDelete
  15. dear sd mihra ji,
    lot of thanks for this artical..aapke articals se hum sabko bahut rahat aur margdarshan milta hai bahi..isse kehte hain +ve thinking.

    ReplyDelete
  16. Shyamdev g ki artcle me bhut schai dikh rhi hai lekin jaisa inhone likha hai vaisa govt. krna chahti hai ya nhi .muje to govt. ki niyt me hi khot dikhta hai fir bhi dhairy rkhna hoga dosto.

    ReplyDelete
  17. baar hatasha milane ki vajah se ab to vishwas nahi hota ki hum logo ka bhi kuchh bhala ho sakata hai.
    ek baat samjh me nahi aati ki kya aisa ho sakata hai ki 72825 logo ki kismat ek saath kharab ho jaye. kya kisi ki kismat achhi nahi hai ki usi ke saath sabhi ka kalyan ho jaye.

    ReplyDelete
  18. yaro uncertainty ki had hai.log apne tet neto ko blaim kar rahe hain app sabko sochna chahiye ki wo proffessional nahi hai .magar hamare pas mauka nahi hai.court main jo third party ki bat chal rahi thi .wo sirf lagta hai kewal idea tha kiy nahi gaya.pls jo kahiye use kariye.kewal bat nahi kam hona chahiye

    ReplyDelete
  19. Thanks Syam dev ji for a good artical.
    My dear friends plz have patience.I think this is the last month for finishing all the problems.All of are born to be a TEACHER & no one can stop us.Plz be in unity.

    HAM BHRASTACHAR KE AAGE GHUTNE NHE TAKENGE ANH THATS THE PROMISE
    .

    ReplyDelete
  20. syam ji ek bat ka jwab je jb vi btc 2008 vale ek bar vigyapti k anusaar academic merit se gujar chuke hai aur 70% logo ki joining bhi ho gyi hai toh ye kha ka rule aur nyay hai ki unhe phle tet se gujara jaye aur dubara se vigyapti may saamil ho kr tet merit mat fight hone k liye kha jaye .
    jwab je saurabhlibra@yahoo,co,in

    ReplyDelete
  21. ek bat ka jwab je jb vi btc 2008 vale ek bar vigyapti k anusaar academic merit se gujar chuke hai aur 70% logo ki joining bhi ho gyi hai toh ye kha ka rule aur nyay hai ki unhe phle tet se gujara jaye aur dubara se vigyapti may saamil ho kr tet merit mat fight hone k liye kha jaye .
    jwab je saurabhlibra@yahoo,co,in

    ReplyDelete
  22. @ Saurabh Ji, agar mai aapka prashn samajh pa raha hu to shayad aapko aisa lag raha hai ki VBTC/BTC+TET walo ko B.Ed.+TET walon par prathmikta dee jayegi aur is se B.Ed.+TET walon ko nuksan hoga to vastav me aisa nahi hai. Nyayalay ne kewal ye kaha hai ki sarkar ye confirm kare ki sabhi candidates (VBTC/BTC+TET and B.Ed.+TET) me se 72825 candidates TET ki merit-list ke aadhar par chune jayenge. Ye merit list VBTC/BTC/B.Ed walon ki alag-alag nahi balki bina BTC/VBTC/B.Ed. ka dhyan diye, sanykt roop se banegi aur BTC/VBTC walon ko sirf 6-months ki training se chhoot milegi aur unko seedhe "Sahayak Adhyapak" ki joining dee jayegi jabki B.Ed. walo ki niyukti "Prashikshu Sahayak Adhyapak" ke taur par dee jayegi jiske antargat unhe 6 months tak Rs. 7300/- ke vetanman par training karni hogi aur uske bad unki niyukti "sahayak Adhyapak" ke taur pe hogi. Isme B.Ed. walon ko koi nuksan nahi, agar hai to sirf 6 months ki seniority ka, jiske bare me mujhe malum hai aap sapne me bhi chinta nahi karenge. Aur aise VBTC/BTC wale bhai-bahan bhi sarkar ke chalaye kanooni chakkaro aur danv-penchon me fanskar aajtak naukri se vanchit hain aur sahanubhuti ke patra hain. Ek bhuktbhogi hee dusrey ki takleef samajh sakta hai, kripya aap nishchint rahen, inki wajah se dusron ke sath anyay nahi hoga. Aapki naukri ki ladai agar aapkey liye mahatvpurn hai to unke liye bhi unki naukri bhee utni hee mahatvpurn hain.

    ReplyDelete
  23. @ Nadeem Bhai, main Great-wreat kuchh nahi hun, bus itna chahta hu ki agar agle sal uttar pradesh ke kisi bhi jile me jaun to har vidyalay me apna koi jannewala, aaplogon me se koi-na-koi bhai jarur mil jaye. Pahchanne se to inkar na kar denge Nadeem bhai?

    ReplyDelete
  24. Shyamdev Mishra jee, bahut-bahut dhanyawaad. Aap ke editorial se hamen dher saari info aur energy milti hai.

    ReplyDelete
  25. syamdev sir very thanks for this great artical
    But ek bat eh nahi samajh me aa raha ki jab other state me such as rajsthan , time limit koi issu nahi hai to up me hi time limit ko issu kyon banaya ja raha hai rajasthan me bhi to tet+bed ka primari me recruitment hone ja raha .
    Hai kya ncte har state ke liye alag alag rules banayegi ..on this point of veiw time limit is not a big issu for this mater ...but thanks for great article..pramodsongra@gmail.com

    ReplyDelete
  26. merit ka adhar to academic hi hoga or eske liye sansodhan kiya jana tai hai, tet vivadit merit hai eske adhar per chayen nahi kiya jayga,,naya vigyapan nikala jayga jisme academica adhar per nukitya hogi,, es vigypan ke radhh hote hi sari tet merit ki sankaye katm ho jaygi or court case bhi...
    nameste bhiya,,,

    ReplyDelete
  27. Jab Duniya me pahli bar England ne second world war ke kharche pure karne ke liye aam aadmi se uski income ka hissa tax ke rup me lene ka decision liya tha to ye pahli bar hua tha aur is par salon tak hay-tauba macha, par aaj duniya ka har desh income-tax leta hai aur har aadmi deta hai. waise hi TET ek nai cheej hai, bawaal to TET ke aadhar par chayan ko leker hee nahi, TET ki anivaryata par bhi ho raha hai.

    ReplyDelete
  28. Pramod ji, samay seema sabkey liye hai, ho sakta hai un rajyon ne kendra se samay seema badhwali ho ya badhane ka aadhikarik request kar diya ho, as Rajasthan, haryana me Congress govt hai, unko to permission waise bhi kendra se mil jayegi. Samay seema gambheer mudda hai par Central ke liye permission dena bhi jaruri hai warna adhyapakon ki niyukti kaise hogi? So dont worry, time limit badh jayegi.

    ReplyDelete
  29. hmm kuch b ho par baat to logical ki h .....thnx

    ReplyDelete
  30. Preraradayak lekh ke liye shri shyam dev mishra ko dhanyabad. Aap isi tarah se lekh likh kar humare utshah badhate rahiye taki hum age bhi tab tak sanghrsh karen jab tak ki manjil na mil jaye.
    So very very thanks

    ReplyDelete

Please do not use abusive/gali comment to hurt anybody OR to any authority. You can use moderated way to express your openion/anger. Express your views Intelligenly, So that Other can take it Seriously.
कृपया ध्यान रखें: अपनी राय देते समय अभद्र शब्द या भाषा का प्रयोग न करें। अभद्र शब्दों या भाषा का इस्तेमाल आपको इस साइट पर राय देने से प्रतिबंधित किए जाने का कारण बन सकता है। टिप्पणी लेखक का व्यक्तिगत विचार है और इसका संपादकीय नीति से कोई संबंध नहीं है। प्रासंगिक टिप्पणियां प्रकाशित की जाएंगी।