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Sunday, June 21, 2015

अंतरराष्ट्रिय योग दिवस 21 जून / International Yoga Day 21st June

अंतरराष्ट्रिय योग दिवस 21 जून / International Yoga Day 21st June

आसन कहां और कैसे करें

- खुले में ताजा हवा में योगासन करना बेहतर है। अगर ऐसा मुमकिन नहीं हो, तो कहीं भी (एसी में भी) कर सकते हैं।




- जहां योगासन करें, वहां माहौल शांत होना चाहिए। शोर-शराबा न हो। हल्की आ‌वाज में मन को शांत करनेवाला म्यूजिक चला सकते हैं।

- सीधे फर्श पर न करें। जमीन पर योगा मैट, दरी या कालीन बिछाकर योग करें।

- थोड़े ढीले कॉटन के कपड़े पहनना बेहतर रहता है। टी-शर्ट व ट्रैक पैंट आदि में भी कर सकते हैं।

- आसन धीरे और तेजी, दोनों तरह से करना फायदेमंद है। जल्दी करें तो कार्डियो (दिल के लिए अच्छा) और धीरे व रुककर करें तो स्ट्रेंथनिंग (मसल्स के लिए बढ़िया) एक्सर्साइज होती है।

- योगासन आंखें बंद करके करें। ध्यान शरीर के उन हिस्सों पर लगाएं, जहां आसन का असर हो रहा है, जहां दबाव पड़ रहा है। भाव से करेंगे तो प्रभाव जल्दी और ज्यादा होगा।

- योग में सांस लेने और छोड़ने की बहुत अहमियत है। इसका सीधा फंडा है : जब भी शरीर फैलाएं, पीछे की तरफ जाएं, सांस लें और जब भी शरीर सिकुड़े या आगे की ओर झुकें, सांस छोड़ते हुए झुकें।

आसन कब करें
सुबह-शाम कभी भी, लेकिन भरे पेट नहीं। पूरा खाना खाने के 3-4 घंटे बाद और हल्के स्नैक्स के घंटे भर बाद योगासन कर सकते हैं। चाय, छाछ आदि तरल चीजें लेने के आधे घंटे बाद और पानी पीने के 10-15 मिनट बाद करना बेहतर रहता है। सुबह टाइम नहीं है तो रात में डिनर से आधा घंटा पहले कर लें।

बरतें ये सावधानियां
- योग में विधि, समय, निरंतरता, एकाग्रता और सावधानी जरूरी है।

- झटके से न करें और उतना ही करें, जितना आसानी से कर पाएं। धीरे-धीरे अभ्यास बढ़ाएं।

- कमर दर्द हो तो आगे न झुकें, पीछे झुक सकते हैं।

- अगर हर्निया हो तो पीछे न झुकें।

- हार्ट की बीमारी/ब्लड प्रेशर वाले और शरीर से कमजोर व्यक्तियों को तेजी से योगासन नहीं करना चाहिए।

- 3 साल से बड़े बच्चे हल्के योग और प्राणायाम कर सकते हैं। मुश्किल आसन और क्रियाएं न करें।

- प्रेग्नेंसी में मुश्किल आसन, कपालभाति कतई न करें। महिलाएं पीरियड्स के दौरान, नॉर्मल डिलिवरी के 3 महीने तक और सिजेरियन ऑपरेशन के 6 महीने तक न करें।

कॉमन गलतियां

फाइनल पॉश्चर तक पहुंचने में जल्दबाजी
किसी भी आसन के फाइनल पॉश्चर तक पहुंचने की जल्दबाजी न करें। अगर तरीका जरा भी गलत हो गया तो फाइनल पॉश्वर तक पहुंचने का कोई फायदा नहीं। फाइनल पॉश्चर तक नहीं भी पहुंच पा रहे, लेकिन तरीका सही है तो आप सही ट्रैक पर हैं। मंजिल पर पहुंचने में देर लगेगी, लेकिन पहुंचेंगे जरूर।

फौरन असर की उम्मीद
योगासन का असर होने में वक्त लगता है। फौरन नतीजों की उम्मीद न करें। खुद को कम-से-कम 6 महीने का वक्त दें और तभी तय करें कि असर हो रहा है या नहीं।

दवाएं छोड़ना
जब भी किसी बीमारी से छुटकारे के लिए योगासन करें तो एक्सपर्ट से पूछकर ही करें। अक्सर योगासन का असर फौरन नहीं होता है। ऐसे में तुरंत दवा बंद न करें। जब बेहतर लगे तो टेस्ट कराएं और फिर डॉक्टर की सलाह से ही दवा बंद करे।

कुछ भी खा सकते हैं
योगासन करते हैं तो भी खाने पर कंट्रोल जरूरी है। अगर हाई कैलरी और हाई-फैट वाला फूड या जंक फूड या तेज मिर्च-मसाले वाला खाना खाते रहेंगे तो योग का खास असर नहीं होगा।

सिर्फ रोग के लिए नहीं योग
लोग बीमारी का इलाज योगासन से करते हैं और फिर योगासन को छोड़ देते हैं। योगासन बीमारियों के इलाज करने के लिए नहीं है, बल्कि इसे लगातार किया जाना चाहिए जिससे कि बीमारियां हो ही ना।

अगर सिर्फ 10 मिनट का ही वक्त हो तो...
- 5 मिनट गर्दन, कंधों, कुहनियों, हाथों, कमर, घुटनों, पैरों, पंजों आदि की सूक्ष्म क्रियाएं (हर दिशा में घुमाना और स्ट्रेच करना) कर लें।
- 2-3 मिनट सूर्य नमस्कार कर लें।
- 3 मिनट अपनी जगह खड़े होकर ही जॉगिंग कर लें।

ऑफिस में करनेवाले योग
सूक्ष्म क्रियाएं : ऑफिस में 7-8 घंटे की ड्यूटी के दौरान 2 बार गर्दन, कंधों, कुहनियों, हाथों, कमर, घुटनों, पैरों, पंजों आदि की सूक्ष्म क्रियाएं (हर दिशा में घुमाना और स्ट्रेच करना) कर लें। 5 मिनट से ज्यादा नहीं लगेंगे।
ताड़ासन : बाथरूम या फिर अपनी सीट पर ही खड़े होकर ताड़ासन (पंजों के बल खड़े होकर दोनों हथेलियों को आपस में फंसाकर सिर के ऊपर जितना हो सके, खीचें।)
डीप ब्रीदिंग : जब भी थकान लगे, अपनी सीट पर ही आंखें बंद करें और लंबी-गहरी सांस लें और छोड़ें। 2-3 मिनट में भी मन रिलैक्स हो जाएगा।

रोजाना करें इनका अभ्यास

1. ताड़ासन
कैसे करें : दोनों पैरों को मिलाकर खड़े हो जाएं। हाथों की उंगलियों को आपस में फंसा लें। अब सांस भरते हुए हाथों को ऊपर की ओर उठाएं और पैरों के पंजों पर शरीर का भार लाते हुए एड़ियां भी उठा लें। ऊपर उठे हाथों को अब थोड़ा सिर के पीछे की ओर ले जाएं, जिससे कमर के निचले हिस्से पर खिंचाव आने लगे। सांस सामान्य रखते हुए पूरे शरीर को ज्यादा-से-ज्यादा ऊपर की ओर जितना खींच सकते हैं, खींच कर रखें। चेहरे पर प्रसन्नता का भाव रखते हुए कुछ देर के लिए यहां रुक जाएं। इस पोजिशन में जब तक संभव हो रुकने के बाद सांस निकालते हुए हाथों को साइड से नीचे की ओर ले आएं। इसका अभ्यास दो से तीन बार करें।

लाभ : शरीर को सुगढ़ बनाता है। नर्वस सिस्टम को एक्टिव करता है और मांसपेशियों में लचीलापन लाता है। गर्दन दर्द व कंधे की जकड़न, ऑस्टियोपोरोसिस, स्लिप डिस्क, गठिया और जोड़ों के दर्द में फायदेमंद है। साथ ही, शरीर को तरोताजा बनाए रखता है। दिन में जब भी थकान लगे, इस आसन को करके हल्कापन महसूस कर सकते हैं। बच्चों की लंबाई बढ़ाने वाला है यह आसन।

सावधानियां : हड़बड़ाहट में न करें। पैरों पर बैलेंस बनाए रखें।

2. उर्ध्वहस्तोत्तानासन
कैसे करें : दोनों पैरों में एक-डेढ़ फुट का फर्क रख कर खड़े हो जाएं। दोनों हाथों को सामने लाकर दोनों की उंगलियों को आपस में फंसा लें और उन्हें ऊपर की ओर ज्यादा-से-ज्यादा उठाएं। बाजू कानों को छूनी चाहिए। अब हाथों को ऊपर की ओर खींचे और सांस निकालते हुए कमर से लेफ्ट साइड में झुक जाएं। घुटने न मोड़ें और एड़ी को भी ऊपर की ओर न उठाएं। ज्यादा-से-ज्यादा झुकने के बाद सांस की स्पीड और कमर के साइड में पड़ते हुए खिंचाव को अनुभव करें। जहां तक संभव हो, इस पोजिशन में रुकने के बाद सांस भरते हुए धीरे से पहले की स्थिति में वापस आ जाएं और दूसरी ओर झुककर भी ऐसा ही करें। 4-5 बार दोनों ओर से ऐसा कर लें।

लाभ : मोटापे को दूर कर शरीर को सुडौल बनाता है। कमर के साइड की फालतू चर्बी को कमकर कमर को पतला करता है। पैंक्रियाज को सक्रिय कर इंसुलिन को बनाने में सहायक है, जिससे डायबीटीज़ में लाभ मिलता है। यह लिवर और किडनी को भी मजबूत देता है। रीढ़ की हड्डी का टेढ़ापन, कमर दर्द, गर्दन दर्द व कंधे की जकड़न से रोकथाम करने वाला है यह।

सावधानी : कमर में ज्यादा दर्द रहता हो तो इसका अभ्यास न करें।

3. त्रिकोणासन
कैसे करें : खड़े होकर दोनों पैरों को ज्यादा-से-ज्यादा खोल लें। दोनों हाथों को कंधों के पैरलल साइड में उठा लें। लंबी-गहरी सांस भरें और सांस निकालते हुए कमर को लेफ्ट साइड में घुमाएं और आगे की ओर झुककर, उलटे हाथ से सीधे पैर के पंजे को छूने की कोशिश करें। अगर पंजा आसानी से छू पाएं, तो हथेली को पैर के पंजे के बाहर की तरफ जमीन पर टिका दें। साथ ही, सीधा हाथ कंधे की सीध में आकाश की तरफ उठाएं और ऊपर की ओर खींचे। नीचे वाला हाथ नीचे की तरफ और ऊपर वाला हाथ ऊपर की तरफ खिंचा रहेगा। गर्दन को ऊपर की तरफ घुमाकर ऊपर वाले हाथ की ओर देखें। सांस की गति सामान्य रखते हुए इस आसन में जब तक संभव हो, रुके रहें। फिर सांस भरते हुए धीरे से वापस आ जाएं। इसी प्रकार दूसरी ओर बदलकर करें। दोनों ओर से यह आसन 3-4 बार कर लें।

लाभ : कमर और गर्दन की मांसपेशियों को लचीला बनाकर उनकी ताकत बढ़ाता है। पैरों, घुटनों, पिंडलियों, हाथों, कंधों और छाती की मांसपेशियां लचीली बनी रहती हैं और कूल्हे की हड्डी को मजबूती मिलती है। पाचन तंत्र को बल मिलता है। कब्ज, गैस व डायबीटीज़ को दूर करने वाला है। शरीर को सुडौल बनाता है। नर्वस सिस्टम को स्वस्थ कर यह आसन मन व मस्तिष्क को बल देने वाला है। बच्चों की लंबाई बढ़ाने में भी यह विशेष सहायक है।

सावधानियां : जितने आराम से कमर को आगे झुकाकर मोड़ सकें, उतना ही करें। जल्दबाजी और झटके से बचें। गर्दन दर्द, कमर दर्द, साइटिका दर्द, ऑस्टियोपॉरोसिस, माइग्रेन, स्लिप डिस्क, पेट की सर्जरी और हाई ब्लड प्रेशर के मरीज इसका अभ्यास न करें।

4. मंडूकासन
कैसे करें : वज्रासन में बैठ जाएं। हाथों की मुठ्ठियां बंदकर पेट पर रख लें। सांस निकालें और पेट अंदर की ओर दबाएं। मुठ्ठियों से भी पेट को दबाकर आगे झुक जाएं। सांस सामान्य रखकर सिर को थोड़ा उठा लें। कोहनियों को शरीर के साथ सटा कर रखें।

लाभ : मंडूकासन पैंक्रियाज़ को सक्रिय कर इंसुलिन बनाने में मदद करता है। इससे शुगर लेवल कंट्रोल होता है। यह पाचन तंत्र को बल देकर उससे जुड़े रोगों को ठीक करने वाला है। कब्ज, गैस, डकार, भूख न लगना, अपच, लिवर की कमजोरी, स्त्री रोग, हर्निया और अस्थमा में लाभकारी है।

सावधानियां : घुटनों में दर्द होने पर वज्रासन न करें। ऐसे में कुर्सी पर बैठकर यह आसन किया जा सकता है। अगर कमर दर्द रहता हो तो इस आसन में आगे न झुकें।

5. भुजंगासन
कैसे करें : पेट के बल लेट जाएं और हाथों को कंधों के नीचे रखकर कोहनियों को उठा लें। पीछे दोनों पैरों को मिलाकर रखें। अब सांस भरते हुए आगे से सिर और छाती को नाभि तक ऊपर उठाएं। इससे ऊपर नहीं। अब सिर को ऊपर की ओर उठाकर सांस की गति सामान्य रखते हुए जहां तक संभव हो रुके रहें। फिर सांस निकालते हुए धीरे से वापस आ जाएं। 2-3 बार ऐसा कर लें।

लाभ : यह रीढ़ की हड्डी को लचीला बनाता है। कमर दर्द, स्लिप डिस्क, सर्वाइकल स्पॉन्डिलाइटिस और ऑस्टियोपॉरोसिस में लाभकारी है। लिवर, किडनी, फेफड़े और थायरॉइड ग्रंथि को बल देने वाला है।

सावधानियां : हर्निया या पेट में अल्सर हो या फिर पेट की सर्जरी हुई हो तो न करें।

6. नौकासन
कैसे करें : लेटकर दोनों हाथों को सिर के सामने सीधा कर आपस में जोड़ लें। पीछे दोनों पैर मिले रहेंगे। अब सांस भरते हुए दोनों हाथों को, सिर को ऊपर की ओर उठाएं और साथ ही पीछे पैरों को भी ऊपर की ओर उठा लें। हाथ व पैर को ज्यादा से ज्यादा ऊपर की ओर उठाने के बाद हाथों को आगे और पैरों को पीछे की ओर खींचें। सांस की गति सामान्य रखते हुए यथाशक्ति आसन में रुके रहें। फिर धीरे से हाथ और पैरों को वापस जमीन पर ले आएं। 2-3 बार ऐसा करें।

लाभ : रीढ़ की हड्डी के रोगों में बड़ा लाभकारी हैं। इससे नर्वस सिस्टम बेहतर होता है। पेट की मांसपेशियों की ताकत बढ़ती है और पाचन सुधरता है। आमाशय, लिवर, आंत, फेफड़े और किडनी आदि अंगों को भी बल देता है।
सावधानियां : हर्निया या पेट का ऑपरेशन, आंतों में घाव या पेप्टिक अल्सर हो तो न करें।

7. उत्तानपादासन
कैसे करें : पीठ के बल सीधे लेट जाएं। पैरों को आपस में मिला लें। हाथों को जंघाओं के पास जमीन पर रख लें। हथेलियों का रुख नीचे की ओर रहेगा। अब सांस भरते हुए दोनों पैरों को 60 डिग्री तक ऊपर उठाकर रुक जाएं। हथेलियां जमीन पर ही रहेंगी। सांस की गति को सामान्य रखते हुए प्रसन्नता के भाव से जब तक संभव हो, आसन में रुके रहें। कुछ देर रुकने के बाद आपको पेट के ऊपर कंपन अनुभव होने लगेगा। अब सांस निकालते हुए धीरे से बिना सर उठाए पैरों को नीचे ले आएं। ऐसा 2-3 बार करें।

लाभ : यह पेट के थुलथुलेपन को दूरकर मोटापा कम करता है। पेट की मांसपेशियों को मजबूती करता है। पाचन तंत्र को बेहतर करता है और दिल व फेफड़ों को स्वस्थ बनाए रखता है। लो ब्लड प्रेशर में लाभकारी है। बालों के झड़ने और सफेद होने से रोकने में भी मदद करता है।
सावधानियां : कमर दर्द, हर्निया और हाई बीपी की स्थिति में इसे न करें।

8. कटिचक्रासन
कैसे करें : दोनों हथेलियों को सिर के नीचे रख लें और दोनों पैरों को मोड़ लें। घुटने आपस में मिले रहेंगे। सांस निकालते हुए घुटनों को एक साथ लेफ्ट साइड में ले जाएं और गर्दन को राइट साइड में। सांस की गति सामान्य रखते हुए यथाशक्ति रुके रहें। यहां घुटने के साथ घुटने और एड़ी के ऊपर एड़ी रहेगी। सांस भरते हुए धीरे से वापस आ जाएं। ऐसे ही दूसरी ओर से करें। दोनों ओर से 3-3 बार कर लें।

लाभ : शरीर की जकड़न को दूर कर यह आसन कमर की मांसपेशियों में लचीलापन और मजबूती लाता है। इससे नर्वस सिस्टम बेहतर होता है। यह पैंक्रियाज़ पर असर डालता है, इसिलए डायबीटीज में लाभकारी है। साथ ही, किडनी, लिवर, आंतें, मलाशय, मूत्राशय आदि पाचन तंत्र के अंगों को मजबूत बनाने में मदद करता है। यह कमर दर्द और साइटिका दर्द को दूर करने में भी लाभकारी है।

सावधानियां : कमर दर्द, हर्निया और हाई बीपी की स्थिति में इसे न करें।

9. पवनमुक्तासन
कैसे करें : पवनमुक्तासन के लिए दोनों पैरों को घुटनों से मोड़कर पेट की ओर लाएं और हाथों से पैरों को कसकर पकड़ लें। सांस निकालें। सिर उठाकर ठोड़ी को घुटनों के बीच रखें। अगर कमर या गर्दन में दर्द रहता हो तो सिर न उठाएं।

लाभ : यह कब्ज, गैस, भूख न लगना और लिवर की कमजोरी को दूर करने वाला है। डायबीटीज में भी लाभकारी है। इसके अभ्यास से मूत्रदोष, हर्निया, स्त्री रोग, कमर दर्द, अस्थमा और हृदय रोग में लाभ पहुंचता है।

सावधानी : कमर दर्द या गर्दन दर्द रहता हो तो इस आसन में सिर न उठाएं।

10. शवासन
कैसे करें : शरीर को ढीला छोड़ कर आराम से पीठ के बल लेट जाएं। दोनों पैरों में एक-डेढ़ फुट का अंतर रखें और दोनों हाथ शरीर से थोड़ी दूरी पर ढीले छोड़ दें। आंखें बंद कर अपने ध्यान को आती-जाती सांस पर ले आएं। अब ध्यान को शरीर के अंगों पर लाएं और नीचे से ऊपर प्रत्येक अंग को साक्षी भाव से महसूस करते जाएं। महसूस करें कि पूरा शरीर शव जैसा पड़ा है। न हिलता है, न डुलता है, बस आराम ही आराम है। उस वक्त मन में कोई विचार नहीं लाना है। कुछ देर आराम करने के बाद अपने ध्यान को सांसों पर लाएं। लंबी, गहरी सांस भरें व निकालें। अब हाथों और पैरों की उंगलियों में चेतना का अनुभव करें। धीरे-धीरे हाथों को उठाकर हथेलियों को आपस में रगड़कर आंखों पर रख लें। कुछ देर बाद हथेलियां हटा कर करवट लेते हुए धीरे से बैठ जाएं। इस आसन को 5-10 मिनट कर सकते हैं।

लाभ : मन को शांत करता है। थकान दूर करता है।

सावधानियां : जल्दबाजी न करें। आराम से करें। सूर्य नमस्कार
सूर्य नमस्कार एक संपूर्ण एक्सरसाइज है। अगर आपके पास ज्यादा वक्त नहीं है तो सुबह 10 बार सूर्य नमस्कार करने से भी आपके पूरे शरीर की एक्सरसाइज हो जाएगी। इससे शरीर के सारे जोड़ खुल जाते हैं और फ्लैक्सिबिलिटी भी आती है। इससे शरीर को ऊर्जा मिलती है और मानसिक तनाव से मुक्ति मिलती है। यह इम्यून सिस्टम और हॉर्मोनल सिस्टम को बैलेंस करता है। मोटापा घटाने में भी यह लाभकारी है। इसमें कुल 12 आसन हैं, जिनका शरीर पर अलग-अलग प्रभाव पड़ता है। सूर्य नमस्कार नीचे दिए तरीके से किया जा सकता है :

सूर्य नमस्कार
1. सबसे पहले दोनों हाथों को सीने पर जोड़कर (नमस्कार की तरह) सीधे खड़े हों।

2. सांस भरते हुए अपने दोनों हाथों को ऊपर की ओर कानों से सटाएं और कमर को पीछे की ओर स्ट्रेच करें।

3. सांस बाहर निकालते हुए और हाथों को सीधे रखते हुए आगे की ओर झुकें। हाथों को पैरों के राइट-लेफ्ट जमीन से स्पर्श करें। ध्यान रखें कि इस दौरान घुटने सीधे रहें।

4. सांस भरते हुए राइट पैर को पीछे की ओर ले जाएं और गर्दन को पीछे की ओर झुकाएं। इस स्थिति में कुछ समय तक रुकें।

5. अब सांस धीरे-धीरे छोड़ते हुए लेफ्ट पैर को भी पीछे ले जाएं और दोनों पैर की एड़ियों को मिलाकर शरीर को ऊपर की ओर स्ट्रेच करें।

6. सांस भरते हुए नीचे आएं और लेट जाएं। पेट जमीन से थोड़ा ऊपर रहेगा। अब सांस छोड़ें।

7. शरीर के ऊपरी भाग को सांस भरते हुए उठाएं और गर्दन को पीछे की ओर स्ट्रेच करें। कुछ सेकंड तक रुकें।

8. अब सांस छोड़ते हुए हिप्स को ऊपर की ओर उठाएं व सिर झुका लें। एड़ी जमीन से लगाएं।

9. दोबारा चौथी प्रक्रिया को अपनाएं लेकिन इसके लिए लेफ्ट पैर को आगे लाएं और गर्दन को पीछे की ओर झुकाते हुए स्ट्रेच करें।

10. लेफ्ट पैर को वापस लाएं और राइट के बराबर में रखकर तीसरी स्थिति में आ जाएं यानी घुटनों को सीधे रखते हुए हाथों से पैरों के राइट-लेफ्ट जमीन से टच करें।

11. सांस भरते हुए दोनों हाथों को कानों से सटाकर ऊपर उठें और पीछे की ओर स्ट्रेच करते हुए फिर दूसरी अवस्था में आ जाएं।

12.फिर से पहली स्थिति में आ जाएं।

किस बीमारी में कौन-सा करें
मोटापा
आसन : सारे आसन फायदेमंद। सूर्य नमस्कार, शलभासन, हस्तपादासन, उर्ध्वहस्तोत्तानासन, कटिचक्रासन ज्यादा असरदार।
प्राणायाम : कपालभाति व भस्त्रिका।

दिल की बीमारी
आसन : ताड़ासन, कटिचक्रासन, एक पैर से उत्तानपादासन, नौकासन, पवनमुक्तासन, बिलावासन (कैट पॉश्चर)
प्राणायाम : अनुलोम-विलोम, उज्जायी, भ्रामरी और ओम का जाप। कपालभाति और भस्त्रिका न करें।

डायबीटीज
आसन : उर्ध्वहस्तोत्तानासन, कटिचक्रासन (लेटकर), पवनमुक्तासन, भुजंगासन, धनुरासन, वज्रासन, मंडूकासन, उड्यानबंध
प्राणायाम : कपालभाति, अनुलोम-विलोम, अग्निसार क्रिया। भस्त्रिका न करें।

जोड़ों का दर्द
कमर दर्द : उत्तानपादासन, अर्धनौकासन, कटि चक्रासन, एक पैर से पवनमुक्तासन, अर्धभुजंगासन, अर्ध नौकासन, कैट पॉश्चर।
गर्दन में दर्द : गर्दन की सूक्ष्म क्रियाएं।

डिप्रेशन
आसन : सभी आसन (खासकर सूर्य नमस्कार, ताड़ासन, नौकास‌न आदि) फायदेमंद हैं।
प्राणायाम : नाड़ीशोधन, भ्रामरी के साथ बाकी प्राणायाम भी कारगर। मेडिटेशन खासकर असरदार।

नोट : यहां चंद योगासनों, प्राणायाम और ध्यान के तरीकों की जानकारी दी गई है। एक ही आसन, प्राणायाम या ध्यान को करने के दूसरे तरीके भी हैं। वे भी सही हैं। इसी तरह इनके अलावा और भी आसन, प्राणायाम और ध्यान हैं और वे भी कारगर हैं। आप किसी एक्सपर्ट से सीख कर ही आसन, प्राणायाम या ध्यान करना शुरू करें। किसी बीमारी की हालत में डॉक्टर की सलाह जरूर लें।

सावधानी : प्रेग्नेंट महिलाएं और कमर दर्द से पीड़ित इसे न करें। हाई ब्लडप्रेशर के मरीज धीरे-धीरे करें।