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Tuesday, March 29, 2016

LLM LLB News - - Lawyer Eligibility Test, law, Lawyer, एलएलएम परीक्षा में जारी रहेगी न्यूनतम अंकों की अर्हता

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एलएलएम परीक्षा में जारी रहेगी न्यूनतम अंकों की अर्हता
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated 02:09 मंगलवार, 29 मार्च 2016
एलएलएम प्रवेश परीक्षा में शामिल होने के लिए न्यूनतम अंक की अनिवार्यता जारी रहेगी। इसे लेकर दाखिल याचिका हाईकोर्ट ने खारिज कर दी है। याचिका में एलएलएम प्रवेश परीक्षा में शामिल होने के लिए सामान्य के लिए न्यूनतम 55 प्रतिशत और एससीएसटी के लिए 50 प्रतिशत अंक एलएलबी में अनिवार्यता को चुनौती दी गई। परीक्षा राजीव गांधी विधि विश्वविद्यालय पंजाब द्वारा आयोजित की जा रही है। अमरजीत चौधरी ने इसके विरुद्ध जनहित याचिका दाखिल कर अंकों की अनिवार्यता समाप्त करने की मांग की थी। इसके साथ परीक्षा शुल्क अधिक लिए जाने को भी चुनौती दी गई थी। याचिका पर मुख्य न्यायमूर्ति डॉ. डीवाई चंद्रचूड और न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा की खंडपीठ ने सुनवाई की।
याची का कहना था कि जब एलएलएम में प्रवेश के लिए परीक्षा आयोजित की जा रही है तो सभी विधि स्नातकों को इसमें मौका मिलना चाहिए। 55 और 50 प्रतिशत अंकों की अनिवार्यता से याची के उच्च शिक्षा पाने के मौलिक अधिकार का हनन हो रहा है। विश्वविद्यालय ने प्रवेश शुल्क चार हजार रुपये रखा है, जबकि मेडिकल और इंजीनियरिंग की प्रवेश परीक्षा में शुल्क 1500 रुपये ही है। कोर्ट ने याचिका यह कहते हुए खारिज कर दी कि प्रवेश परीक्षा के लिए न्यूनतम अंक का निर्धारण विश्वविद्यालय का अधिकार है। ऐसा करके उसने कोई मनमाना कार्य नहीं किया है। चूंकि याची न्यूनतम अर्हता नहीं रखता है, इसलिए उसे शुल्क के मामले को भी चुनौती देने का अधिकार नहीं है

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Monday, October 12, 2015

क्या हमारे देश का कानून बेहद कमजोर नहीं है ???

क्या हमारे देश का कानून बेहद कमजोर नहीं है ???


4  साल से प्रशिक्षु शिक्षक अपनी नियुक्ति के लिए भटक रहे हैं , उनका गुनाह क्या है । 

और जो लोग इनकी मुश्किलों के लिए दोषी हैं , वो आराम से जी रहे हैं । 

शिक्षा मित्र मामले में प्रथम दृष्टया केस था की बगैर टेट शिक्षक कैसे बने , और उस पर डेट पर डेट लग रही थी । 

वो तो सुप्रीम कोर्ट का असर था की सुनवाई जल्द करनी पडी । 

वरना उमर गुजर जाती और हाई कोर्ट डेट पर डेट लगाती रहती । 


बात यह की शिक्षा मित्रों का या टेट पास वालों का कॅरियर बेहतर होना चाहिए , और बच्चों के शिक्षा के अधिकार का अच्छे से पालन होना चाहिए , जिससे आर टी ई अधिनियम का वास्तविक उद्देश्य पूरा हो सके । 
शिक्षा मित्रों को व टेट पास जो भी हों सही रास्ते से  गुणवत्ता परक शिक्षक बनाया जाना चाहिए । 

अब कानून की बात करते हैं - देश के कानून में भुगतता बेगुनाह ही है , और आराम कानून तोड़ने वाला उठाता है । 

जब तक कानून दोषियों को सजा नहीं देगा , तब तक कानून तोडा जाता रहेगा । 

जब भी कानून अपना फैसला दे तो साथ में उसके दोषियों के उचित दंड भी दे , चाहे उनकी सैलरी से रिकवरी की जाये या कुछ और । 

यहाँ टेट पास लाखों की संख्या में थे , वरना आम इंसान कहाँ तक कोर्ट में लड़ता और इसका खर्च उठाता । 
अब यह कोर्ट का खर्च किस से मिले , जाहिर से बात है की जो भी दोषी हों उनकी सेलरी से मुआवजा की राशि इन टेट पास वालों को दिलवा दो , इसके बाद 
अपने आप कानून में सुधार आने लगेगा । 

बात सिर्फ टेट पास वालों की नहीं है , हिंदुस्तान में भ्रस्टाचार अपने आप समाप्त होने लगेगा जब कानून तेजी से प्रथम दृष्टया केसों में फैसला देने लगे ,

और अन्य केसेस भी त्वरित गति  निबटाए । 

साथ ही न्याय सस्ता हो और आसान प्रक्रिया बनाई जाए 

आसान प्रक्रिया ऐसी हो सकती है - आप केस ऑनलइन दर्ज कर सकें , और उसके सपोर्टिंग डॉक्यूमेंट ऑनलाइन अपलोड कर सकें ,
उसके बात प्रथम दृष्टया बातों पर पहले ध्यान दिया जाए । 
दोनों पक्षों की हियरिंग ऑनलाइन चेट के माध्यम से दर्ज की जा सकती है , उसके बाद जैसा जज चाहें उनके लिखित दस्तावेज के प्रिंट आउट को हस्ताक्षर सहित अपने न्यायलय में मंगवा लें । 
उसके बाद केवल ख़ास मुद्दों पर सुनवाई के लिए दोनों पक्षों को पर्सनल हियरिंग के लिए बुलाया जा सकता है ।

हमारे देश के आर टी आई सिस्टम भी गन्दा है , ऑनलाइन आर टी आई का प्रावधान नहीं है , सी आई सी ने ऐसा प्रबंध कर रखा है की वह जो चाहे फैसला दे ओरल आधार पर , बाद में भले ही किसी पक्ष को गलत भी लगे लेकिन वह उसका रिव्य अपील नहीं फाइल कर सकता , यह सब सी आई सी  ने अपनी सुरक्षा के लिये कर रखा है । 
और उसके बाद फिर आदमी को कोर्ट के चक्कर लगाने पड़ेंगे । 

2009 -10 के काल में अन्ना आंदोलन के दौरान आर टी आई मजबूत थी , लेकिन दिनों दिन यह कमजोर होती चली गई और कमजोर होती जा रही है । 
उस दौरान कुछ महत्वपूर्ण फैसले ऐसे थे -
देश का कोई भी नागरिक किसी भी सरकारी अधिकारी की ए सी आर / वार्षिक गोपनीय रिपोर्ट ( जो की प्रमोशन के लिए उपयोग की जाती है ) मांग सकता है ,
इस से पारदर्शिता बढ़ी और प्रमोशन में चापलूसी और हेरा फेरी पर रोक लगने लगी , बड़े अधिकारी और नेताओं के हाथ बंधने लगे । 

नेताओं और अधिकारियों को यह सब पसंद नहीं आ रहा था , तो उन्होंने आर टी आई कानून में बदलाव करके गोपनीयता के नाम पर यह सब बंद करवा दिया । 
सी आई सी अपने फैसलों को रिव्य करती है , मगर सरकारी पक्ष को बचाने के लिए , उसने अपने गलत फैसले आम आदमी के सूचना के अधिकार के पक्ष में कभी रिव्यू  नहीं किये । 

अगर कोई जन सूचना अधिकारी अधिकारी झूठ में यह भी कह दे की उसने मांगी गयी सूचनाएँ मुहैया करा दी , तो आप दोबारा से उस डॉक्यूमेंट को नहीं मांग सकते । 
रिपीटेड इंफोर्मेशन मांगना सूचना के अधिकार में अलाउ नहीं है । 


अंत में यही कहना है , की जब तक देश का कानून व् सिस्टम मजबूत नहीं होगा । 
तब तक देश का आम नागरिक गुलामी की तरह ही जीता रहेगा । 

लोगो को कजरीलाल नाम की गिरगिट से बहुत आशा थी , लेकिन वो सुपर गिरगिट निकला । 

वो वी आई पी कल्चर ख़त्म करने की बात कहता था , लेकिन आज खुद बंगले में रहता है , उसका खुद का जन  लोक पाल भी नहीं आ पाया , और आज तक उसमे भी कोई चूहा नहीं पकड़ा गया । अन्ना का जान लोक पाल भी फुस्स हो गया । 


बाबा राम देव रातों रात काला धन पर कानून बनाने को कोंग्रेस सरकार से कह रहे थे , की सारा काला  धन जो भी देश विदेश में हो उसको राष्ट्रिय संपत्ति घोषित कर दी जाए । 
लेकिन अब उनके कानून बनाने की योजना फुस्स हो चुकी है । 

बड़े बड़े पावर फुल लोगो के हाथ में देश का सिस्टम है , और राजनीती काले धन से ही चलती है ।
तो फिर काले धन पर कानून क्यों और कैसे बनेगा । 


कुल मिलाकर सीधी और सच्ची बात - जब तक देश का सिस्टम अच्छा नहीं बनेगा तब तक देश का आम गरीब इंसान कुचला जाता रहेगा 
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Wednesday, May 28, 2014

Lawyer Eligibility Test : टीइटी की तर्ज पर वकीलों को भी देनी होगी परीक्षा

Lawyer Eligibility Test : टीइटी की तर्ज पर वकीलों को भी देनी होगी परीक्षा

रामपुर। टीइटी की तर्ज पर अब नए अधिवक्ताओं को भी परीक्षा देनी होगी। यह परीक्षा बार कौंसिल आफ इंडिया की ओर से कराई जा रही है, जो 27 जुलाई को होगी।
परीक्षा के संबंध में बार कौंसिल आफ इंडिया ने सभी राज्यों की बार कौंसिल को सूचना दे दी है। बार कौंसिल आफ उत्तर प्रदेश के उपाध्यक्ष अखिलेश कुमार अवस्थी ने परीक्षा के संबंध में जिला बार एसोसिएशन को पत्र भेजा है। बार एसोसिएशन के महामंत्री अमर सिंह यादव ने बताया कि वर्ष 2010 या उसके बाद विधि स्नातक उत्तीर्ण होने वाले और बार कौंसिल में पंजीकरण कराने वाले अधिवक्ता को यह परीक्षा देनी होगी। परीक्षा 27 जुलाई को होनी है, जिसके रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया 21 अप्रैल से शुरू हो चुकी है।
गौरतलब है कि आल इंडिया बार एक्जामिनेशन का यूपी बार कौंसिल के अलावा पूरे देश की राज्य बार कौंसिल ने विरोध किया था। लेकिन, बार कौंसिल आफ इंडिया ने इस विरोध को नहीं माना और नियमों में संशोधन कराकर वर्ष 2010 के बाद विधि स्नातक करने वाले व बार कौंसिल में पंजीकरण कराने वाले वकीलों के लिए इस परीक्षा को पास करना अनिवार्य कर दिया है


News Sabhaar : Jagran (Tuesday,May 27,2014) / http://www.jagran.com/uttar-pradesh/rampur-11349168.html
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