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Tuesday, June 30, 2015

NEWS सिकंदर के ग्रीस का मुकद्दर रूठा, आज कर्ज चुकाने का आखिरी दिन

NEWS सिकंदर के ग्रीस का मुकद्दर रूठा, आज कर्ज चुकाने का आखिरी दिन



एथेंस। कभी दुनिया जीतने निकले सिकंदर का ग्रीस (यूनान) आज बाजार की बाजी हारता नजर आ रहा है। मुकद्दर ने साथ नहीं दिया तो वह 21वीं सदी का ऐसा पहला देश बन जाएगा जो डिफाॅल्टर घोषित होगा। अब तक मनुष्य और कंपनियां ही डिफॉल्टर घोषित होती रही हैं।

ग्रीस पर 11 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा कर्ज है। इसकी पहली किस्त में 12 हजार करोड़ रुपए चुकाने का मंगलवार को आखिरी दिन है।



अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) अपनी इस डेडलाइन को तब तक आगे बढ़ाने को तैयार नहीं है, जब तक ग्रीस उसकी शर्तें नहीं मान लेता। गहराते संकट के बीच दुनियाभर के शेयर बाजारों की नजर 5 जुलाई को होने वाले जनमत संग्रह पर टिकी हैं। ग्रीस के लोग उस दिन इस बात पर वोटिंग करेंगे कि उनके देश को ये शर्तें माननी चाहिए या नहीं? अगर देश ने आर्थिक सुधारों की मांग को खारिज कर दिया तो 20 जुलाई को यूरो जोन की बैठक में ग्रीस डिफॉल्टर घोषित हो जाएगा और उसे यूरो जोन से बाहर का रास्ता दिखा दिया जाएगा।



अपनी हैसियत से अधिक खर्च करने के लिए बदनाम हो चुके ग्रीस में 6 जुलाई तक सारे बैंक बंद कर दिए गए हैं। एटीएम से भी एक दिन में 60 यूरो (करीब 4300 रुपए) से ज्यादा निकालने पर रोक है। यही वजह है कि एटीएम पर भारी भीड़ है। लोग बिना अनुमति देश से बाहर पैसे नहीं भेज सकते हैं। स्टॉक एक्सचेंज बंद हो गया है।


वो सबकुछ जो आप जानना चाहते हैं, बता रहे हैं- भास्कर एक्सपर्ट अर्थशास्त्री बीबी भट्‌टाचार्य



कितना कर्ज
ग्रीस पर 11.14 लाख करोड़ रुपए का कर्ज है। जो जीडीपी का 175% है। भारत का कर्ज जीडीपी के मुकाबले 68 फीसदी है।



आज क्या?
आईएमएफ के 12 हजार करोड़ रु. चुकाने हैं। आईएमएफ समय सीमा नहीं बढ़ाता, लेकिन संभव है/ कि 5 जुलाई तक का समय दे देे।



शर्तें नहीं मानी तो?
वह यूरोपियन यूनियन और यूरो जोन से बाहर हो सकता है। तब उसे अपनी पुरानी करेंसी ड्रैकमा लागू करनी पड़ेगी। लेकिन यह आसान नहीं होगा। यूरो-ड्रैकमा की अदला-बदली का अनुपात तय करना मुश्किल होगा।



यह विचारधारा की भी लड़ाई
ग्रीस की नई सरकार वामपंथी है। आईएमएफ और पश्चिमी देश पूंजीवादी विचारधारा के हैं। आईएमएफ की शर्तों के मुताबिक ग्रीस कुछ सरकारी खर्च कम करने को तैयार है। लेकिन वह टैक्स भी बढ़ाना चाहता है। आईएमएफ को ये मंजूर नहीं।



और क्या संभव है?
व्यापार का बहिष्कार हो सकता है। यह कठोर कदम होगा। ग्रीस का आयात-निर्यात बंद हो जाएगा।



तो क्या 2008 जैसी मंदी?
ग्रीस संकट का असर 2008 के लीमन संकट से कम होगा। हालांकि, छोटी अवधि के लिए असर दिखेगा। बाजार पहले ही ये संकट भांप चुका है, इसलिए लंबी अवधि के लिए असर नहीं पड़ेगा।

हम पर असर?


बहुत ही मामूली

भारत के कुल निर्यात में ग्रीस का हिस्सा 0.1%, आयात में 0.03% है। जो दिक्कत आएगी करेंसी की वजह से। यूरो ज्यादा गिरा तो यूरो जोन को निर्यात प्रभावित होगा।



संकट खिंचा तो?
ग्रोथ रेट में मामूली गिरावट आ सकती है। ब्याज दरें बढ़ेंगी।



शेयर बाजारों का क्या?
अनिश्चितता में एफआईआई पैसा निकाल कर रख लेते हैं। इसलिए तेज उतार-चढ़ाव दिख सकता है। सोमवार को भी सेंसेक्स 600 अंक गिरा, लेकिन फिर संभल गया।



कर्ज माफ हो, वरना सब भुगतेंगे
ग्रीस का कर्ज माफ हो या 10 साल तक कर्ज वापसी रोक दी जाए। उसे और मदद दी जाए। वरना संकट पूरी दुनिया में फैलेगा। - जोसेफ स्टिगलिज, नोबेल विजेता अर्थशास्त्री



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