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Thursday, April 19, 2012

RTE : कितना मुफ्त कितना अनिवार्य


RTE : कितना मुफ्त कितना अनिवार्य

Amar Ujala / Aakhiri Kona
सर्वोच्च न्यायालय ने अपने ऐतिहासिक फैसले में शिक्षा के अधिकार कानून की वैधानिकता बरकरार रखते हुए देश के हर गरीब बच्चे की उम्मीदें जगाई हैं। शिक्षा के अधिकार को पूरी तरह से कामयाब बनाने के लिए अगले पांच वर्षों में करीब दो लाख करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे, जिसमें से 65 प्रतिशत केंद्र और 35 प्रतिशत राज्य सरकारें वहन करेंगी।

जिस देश में छह से चौदह वर्ष तक की उम्र के 80 लाख बच्चे शिक्षा से वंचित हैं, जहां हर चार में से एक बच्चा पांचवीं कक्षा में आने से पहले ही स्कूल छोड़ देता है, जहां चार में से दो या दो से ज्यादा बच्चे आठवीं से पहले ही पढ़ाई से मुंह मोड़ लेते हैं, जिनमें लड़कियों की संख्या ज्यादा है, उस देश में यह सब पढ़ना-सुनना बेहद सुखद लगता है। लेकिन महंगे स्कूलों में गरीब बच्चों का शिक्षा पाना क्या इतना आसान है, जितना सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने के बाद लगता है?

सर्वोच्च न्यायालय ने ठीक ही कहा कि शिक्षा के अधिकार को बच्चों के नजरिये से देखा जाना चाहिए, स्कूल संचालकों के नजरिये से नहीं। लेकिन सरकार के शिक्षा का अधिकार कानून में कई कमजोरियां भी हैं, जिनके जवाब अगर सुप्रीम कोर्ट सरकार से ले पाता, तो ज्यादा ठीक रहता। सबसे बड़ी कमजोरी यही है कि इसमें शिक्षा से वंचित बच्चों की परिभाषा तो दी गई है, लेकिन इसके लिए कोई आर्थिक पैमाना न होने से भ्रम फैलेगा। कानून के मुताबिक, अनुसूचित जाति, जनजाति और पिछड़ा वर्ग के बच्चे 25 फीसदी के कोटे में आएंगे।

हैरानी की बात है कि क्रीमी लेयर को इससे अलग नहीं रखा गया है। इसके अलावा अलग-अलग राज्य सरकारों द्वारा तय की गई आर्थिक रूप से कमजोर की सीमा को माना जाएगा। यह सीमा पचास हजार रुपये सालाना से लेकर दो-तीन लाख रुपये तक की है। इससे ऐसा भी हो सकता है कि सरकारी नौकरी या निजी क्षेत्र में काम करने वाले क्लर्क का बेटा तो शायद इस पैमाने से बाहर हो जाए, लेकिन निजी व्यवसाय करने वाले का बच्चा कोई भी आय प्रमाणपत्र दिखाकर दाखिले का हकदार बन जाए। आखिर किस आधार पर निजी स्कूल किसी बच्चे को दाखिले लायक समझेंगे या स्कूल आय प्रमाणपत्र की जांच कैसे कर पाएंगे, इसे कानून में स्पष्ट नहीं किया गया है।

इस कानून में छह से 14 वर्ष के बच्चों की चिंता तो की गई है, लेकिन तीन से छह वर्ष तक के बच्चों के लिए कोई उपाय नहीं किया गया है, जिसकी संख्या अभी करीब 19 करोड़ है। ऐसे बच्चों की बुनियादी शिक्षा की सदिच्छा जरूर जाहिर की गई है। अगर सरकार को गरीब बच्चों की इतनी ही चिंता थी, तो वह इन बच्चों को भी कानून के दायरे में लाती, ताकि वे बच्चे जब पहली कक्षा में किसी बड़े स्कूल में पढ़ने जाते, तो किसी तरह कमजोर साबित नहीं होते।

इसके अलावा आठवीं के बाद की पढ़ाई के बारे में कानून में कोई व्यवस्था नहीं है। क्या गरीब बच्चों के घरवाले तब तक इतने संपन्न हो जाएंगे कि आगे वे उसी महंगे निजी स्कूल में अपने बच्चों को पढ़ा सकें। अगर नहीं, तो आजादी के बाद एक ऐतिहासिक कानून बनाते समय सरकार को ध्यान रखना चाहिए था कि चौदह की उम्र सीमा को बढ़ाकर अठारह कर दिया जाए।

सरकार का कहना है कि नियमों के विरुद्ध जाने वाले स्कूलों की मान्यता रद्द की जा सकती है, लेकिन अपने देश में किस तरह मान्यता दी जाती है और किस तरह नियमों का उल्लंघन किया जाता है, यह हर कोई जानता है। ऐसे में अगर कानून का तोड़ निजी स्कूलों ने तलाश लिया, तो सरकार उसका कुछ बिगाड़ पाएगी, ऐसा संभव नहीं दिखता। कानून में बताया गया है कि प्रशिक्षित शिक्षकों की योग्यता का निर्धारण एक अकादमिक प्राधिकरण करेगा और कानून लागू होने के पांच वर्ष बाद तक अप्रशिक्षित शिक्षकों का इस्तेमाल होता रहेगा।

इसमें अप्रशिक्षित शिक्षकों की नियुक्ति में नियमों को लचीला बनाए रखने की व्यवस्था की गई है। इसी से पता चलता है कि सरकार प्राथमिक शिक्षा को लेकर कितनी गंभीर है और इस कानून से क्या हासिल होगा। ऐसे में शिक्षाविद् अनिल सद्गोपाल की यह टिप्पणी सटीक लगती है कि यह कानून न तो मुफ्त में शिक्षा की व्यवस्था करता है और न ही उसे अनिवार्य बनाता है

Source  : Amar Ujala (18.4.12)
http://www.amarujala.com/Vichaar/VichaarColDetail.aspx?nid=460&tp=b&Secid=48

30 comments:

  1. Actually U P Government khud hi confused hai. UPTET cancel karane ke liye hi sari mathapachchi ho rahi hai, taki bharti ka shreya liya ja sake aur saath hi BSP se dushmani bhi nikali ja sake.

    Lekin afsos use koi thos sabut nahin mil paa raha hai.

    Jitni energy ye sab en faltoo ke kaamon jaise taang khichane mein kharch karte hain usaki aadhi bhi productive kaam mein karein, to U P swarg ban jaaye.

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  2. agar bharti tet merit par nahi hua to mamala court me jayega aur prakriya lambe samay tak latak jayegi.

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  3. Jaroori hai rte me tet teachers ko mauka mile

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  4. Tiwari ji aap sahi kah rahe hi agar iski hAlf energy bhi court me stay hTane ke liye ki hoti to up ko 72825 suyogyA teacher mil chuke hote par ye up ka durbhagya hai

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  5. sarkar chahe jitni koshish kar le merit to tet se hi banegi ... kyo ki ham satya ka sath de rahe hai..aur satya hamesha vijayi hota hai....... kisi ne satya hi kaha hai ki " Satya pareshan hota hai prajit nahi"..so wait $ watch...jai tet morcha

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  6. chayan tet merit se hona chahiye nhi to court ka sahara lena chahiye.

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  7. Ab dosto sarkar divide n rule kar rahi hai hume baat rahi hai kuch acd kuch tet 2 9 court me bharti 2014 Mp election

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  8. Par ek acha point tet me koi dhandli k sabut nhi mile ... Its very good news 4 us

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  9. Comment dete samay aap log apna m.number bhi likha kare.jis se kisi bhi situation ke liye hamare leaders ko news dene me problem na ho.HAM CHOR NAHI TEACHERS HAI .

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  10. vigyapn me koi badlav puri prakriya ko 2 sal tak court ka dicision aane tak rok dega

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  11. अखिर कब होगा टीईटी मेरिट से चयनǃ
    धोखाǃ धोखाǃ टीईटी पास करने वालों बेरोजगारों से। टीईटी से मेरिट को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई थी जहां हाईकोर्ट ने टीईटी मेरिट को अच्‍छी प्रक्रिया माना। टीईटी मेरिट से चयन के लिए धरना प्रदर्शन आंदोलन डण्‍डे बेरोजगारों को खाना पड़ा। मुख्‍यमंत्री का आश्‍वासन पाकर छात्र रूक गये लेकिन थके नहीं। आज जब यह रिपोर्ट आ रही है कि टीईटी को रद् कर दिया जाये और चयन का आधार हाईस्‍कूल इण्‍टरमीडिएट बीए के अंक से चयन होगा इसके लिए नियमों में परिवर्तन होगा। क्‍या टीईटी उतीर्ण करने वाले छात्र के साथ अन्‍याय नहीं हो रहा हैॽ आखिर ऐसी व्‍यवस्‍था पर मुहर क्‍यों लगाई जाएगी। जिससे केवल नकल माफियों को और नकल की प्रवृत्‍ति को बढ़ावा ही मिलेगा।
    क्‍या सभी पहलुओं पर गौर हुआ हैॽ
    इस रिपोर्ट को तैयार करने में सभी पहलुओं पर ध्‍यान दिया गया हैॽ यह सवाल हर एक के मन में गूंज रहा है। क्‍या यह नहीं दिखता कि किस तरह से यूपी बोर्ड में धुंआधार नकल होती है। बीएड डिग्री कालेज भी चाहते है कि उनके कालेज में नंबर पाने के लिए हजारों रूपये देने वाले छात्र मिले। क्‍या सभी बोर्ड और यूनिवर्सिटी में एक ही परीक्षा होती है एक ही सेलेबस है एक ही पैटर्न पर मार्किंग होती हैॽ नहीं तो कैसे हाईस्‍कूल इण्‍टरमीडिएट बीए के अंकपत्र देखर आप अन्‍तिम रूप से उसे अन्‍य के मुकाबले सर्वश्रेष्‍ठ मानकर शिक्षक बना देंगे। क्‍या एकेडमिक की मेरिट से चयन लोकतंत्रिक तरीका हैॽ नहीं। क्‍यों आज शिक्षा में इस कदर भ्रष्‍टाचार से भरा पड़ा है कि चयन से लेकर ट्रांसफर तक में नोट खिलाना पड़ता है। अरबों रूपये काली कमाई नकल कराने के नाम पर वसूल किया जाता है। पिछले समय की खबरों को देखे तो इसे नकारा नही जा सकता है कि इसमें शिक्षा विभाग के कुछ भ्रष्‍ट लोग भी जुड़े हैं। क्‍या रिपोर्ट में इस पहलुओं पर गौर किया गया है।


    with love and regards
    Puneet

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  12. ऐकेडमिक अंक कैसे है एक समान यचन की प्रणाली हैॽ
    जब मार्किंग की एक समान प्रणाली नहीं है तो चयन का आधार अलग–अलग बोर्ड और यूनिवर्सिटी के नंबरों को एक तराजू में तौलकर किसी को आप टीचर कैसे बना सकते हैं। सोचिये इलाहाबाद विश्‍वविद्यालय से 50 प्रतिशत स्‍नातक की काबलियत ओपेन यूनिवर्सिटी के 75 प्रतिशत के बराबर होगीॽ यहां इलाहाबाद विश्‍वविद्यालय छात्र तो 25 अंकों से ओपेन यूनिवर्सिटी के छात्र से पिछड जाएगा और चाहे इलाहाबाद यूनविर्सिटी से पास यह छात्र अपनी मेंहनत से टीईटी में 85 प्रतिशत अंक ही क्‍यों न लाया हों वह प्राइमरी टीचर नहीं बन सकता है भले वह केंद्रीय विद्‍यालय संगठन में उसका चयन हो जाएगा क्‍योंकि वहां चयन का अन्‍तिम आधार एकेडमिक नहीं है यानी वह वहां टीचर बन सकता है लेकिन उत्‍तर प्रदेश में इलाहाबाद विश्‍वविद्‍याल का उतीर्ण स्‍नातक और वहीं से बीएड करने वाला छात्र यहां प्राइमरी टीचर की दौड़ में पीछे हो जएगा। जब एनसीटीई यह कहती है शिक्षक पात्रता परीक्षा 60 प्रतिशत से उतीर्ण करने वाले शिक्षक बन सकते हैं और यह भी कहता है कि चाहे तो अपना स्‍कोर बढ़ाने के लिए वह हर बार परीक्षा में बैठ सकता है तो साफ है कि यह पात्रता परीक्षा के अंक का महत्‍व है। यानी टीईटी मेरिट से चयन का आधार भी सही है।

    प्राइमरी टीचर की भर्ती कंपटीशन से क्‍यों नही होतीॽ
    हम सब जानते है कि किसी भी पद के लिए काम्‍पीटीशन सही होता है उसी के अंक के आधार पर चयन होता है। लेकिन जब टीईटी अनिवार्य है और सरकार प्राइमरी टीचर की भर्ती हेतु कोई कंपटीशन कराके प्राइमरी टीचर की भर्ती करने से बचती रही है लेकिन जब आज शिक्षा अधिकार कानून के अंतर्गत टीईटी परीक्षा अनिवार्य कर दिया गया तो इसके अंकों की मेरिट से चयन क्‍यों नहीं हो सकता है हम सब जानते है कि सरकार कंपटीशन कराने की प्रक्रिया से बचती रही है। अब सरकार अपनी जिम्‍मदारियों से पल्‍ला नहीं झाड़ सकती है। क्‍योंकि टीईटी अनिवार्य है और प्राइमरी टीचरों का चयन प्रतियोगी परीक्षा के आधार पर होना चाहिए। फिलहाल टीईटी के नंबरों के आधार पर चयन उचित है। मुख्‍यमंत्री को भेजे जाने वाले इस रिपोर्ट में जिसमें केवल चयन का आधार एकेडमिक मेरिट से हो कि सिफारिश को नहीं मानना चाहिए क्‍यों की इससे सभी मेधावी छात्रों के साथ न्‍याय नहीं होगा। समझना चाहिए कि इस रिपोर्ट से केवल नकल करने वाले छात्र और शिक्षा माफियों की दुकान चल पड़ेगी। और यह भी ध्‍यान रखना चाहिए की एकेडमिक मेरिट चयन सही नहीं है क्‍योंकि सभी बोर्ड और विश्‍वविद्‍यालय की नंबर देने और परीक्षा कराने में जमीन आसमान अंतर है ऐसे में लोग पिछले चार पांच सालों में ऐसे संस्‍थानों से हाईस्‍कूल इण्‍टर बीए और बीएड कर जिन पर हमेशा संदेह रहा है और वहां पैसे के बल पर रेवड़ी की तरह अंक बांटे जाते हैं। यहां 70 से 80 प्रतिशत अंक छात्रों को आसानी से मिलता है जबकि कई ऐसे यूनिवर्सिटी हैं जहां टापर मुश्‍किल से 70 प्रतिशत अंक पाते है। ऐसे में प्राइमरी टीचर की भर्ती के चयन का आधार केवल कंपटीशन या टीईटी मेरिट होना चाहिए / मिलता है।


    with love and regards

    Puneet

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  13. ग्रामीण डाक सेवकों की भर्ती केवल हाईस्‍कूल की मेरिट से होने वाली है
    भारतीय पोस्‍टल डिपार्टमेंट यानी भारतीय डाक विभाग की ओर से इन दिनों ग्रामीण डाक सेवा जोकि ग्रामीण क्षेत्र में सुचारू रूप से डाक सेवा उपलब्‍ध कराने के लिए डाक विभाग ग्रामीण डाक सेवकों की भर्ती करता है। हाईस्‍कूल पास कोई भी व्‍यक्‍ति जिसकी उम्र 40 साल से कम है और वह भारत का नागरिक हो वह आवेदन कर सकता है। ग्रामीण डाक सेवकों की भर्ती ग्रामीण क्षेत्रों में डाक व्‍यवस्‍था उपलब्‍ध कराने के लिए डाक सेवक के रूप में ग्रामीण सहायक पोस्‍टमास्‍टर की भर्ती की जाती है। यह भर्ती जिले के प्रधान डाकघर से निकाली जाती है। आपकों बता दे कि ग्रामीण सहायक पोस्‍टमास्‍टर के कर्मचारी नियमित कर्मचारी की तरह नहीं होते है बल्‍कि पोस्‍टल डिपार्टमेंट 4 से 5 घण्‍टे के कार्य के लिए भारत सरकार के छटे वेतन आयोग के अनुसार एक सरकारी कर्मचारी की तरह सभी भत्‍ते एवं सुविधाएं देती हैं। 3 साल की सेवा के बाद स्‍थाई कर्मचारी बनने के लिए पोस्‍टल डिपार्टमेंट में ग्रामीण डाक सेवकों को 50 प्रतिशत रिजर्व सीट के लिए उनकी लिखित परीक्षा की मेरिट के अनुसार भारतीय डाक विभाग के स्‍थाई कर्मचारी के रूप में चयन का अवसर मिलता है। यानी की अर्ध सरकारी कर्मचारी से तीन साल बाद स्‍थाई कर्मचारी बनने का एक सुनहरा अवसर मिलता है। साथ ही यह स्‍पष्‍ट कर दें कि 4 घंटे की इस नौकरी में सात से आठ हजार रूपये आसानी से मिल जाते है और इसके अलावा आप कोई कार्य करने के लिए स्‍वतंत्र है और बकायदा यहां सेवानिवृत्‍ति की उम्र सरकारी कर्मचारियों की तरह 60 साल है।
    भर्ती प्रक्रिया
    ग्रामीण डाक सेवा की भर्ती नियमावली के अनुसार हाईस्‍कूल के प्रतिशत के योग्‍यता क्रम में मेरिट बनाई जाती है और इस एकेडमिक मेरिट में केवल हाईस्‍कूल के अंक ही जोड़े जाते हैं उच्‍च योग्‍यता इंटर बीए आदि के कोई प्रतिशत नहीं जोड़ा जाता है।
    आश्‍चर्य है कि ग्रामीण डाक सेवकों की चयन के बारे में किसी अखबार और बेवसाइट में कोई सूचना नहीं मिलती है। यानी आप आसानी समझ सकते हैं कि क्‍यों नहीं होती है। जबकि इसकी सूचना समय समय पर जिले के सेवानियोजन कार्यालय और जिस जिले के लिए भर्ती होनी है उस जिले के प्रधान डाकघर के डिस्‍पले बोर्ड या वहां पूछताछ से प्राप्‍त की जा सकती है। अगर तब भी यह कहकर टाल दे कि ऐसी कोई भर्ती नहीं होती है तो निःसंदेह आपस सूचना के अधिकार का प्रयोग कर सकते हैं। अखबार के माध्‍यम से सूचना प्रकाशित होती है पर यह अखबार के स्‍थानीय संस्‍करण होता है अन्‍य जिले के लोग जिस जिले की भर्ती है उसके बारे में जानकारी संभवता नहीं मिल सकती है। आप समझ सकते है कि ऐसा क्‍यों होता है लेकिन आप उस जिले के प्रधान डाकघर के अधिकारी से व्‍यक्‍तिगत रूप से प्राप्‍त कर सकते हैं। इस समय लगभग हर जिला में ग्रामीण डाकसेवकों की भर्ती होने वाली है। अभी हाल में बदायूं और बरेली में यह प्रक्रिया चल रही है या पूरी हो चुकी है। इस समय जौनपुर में ग्रामीण डाकसेवकों की भर्ती के लिए किसी अखबार में छोटा सा विज्ञापन आया है ऐसी जानकारी मिली है पर वहां जाकर पता करने पर फार्म का प्रारूप पता चलेगा।
    ध्‍यना दें कि यह भर्ती केवल हाईस्‍कूल की मेरिट से होती है। शायद यही कारण की हम और आप नहीं जानते क्‍योंकि कहीं न कहीं इसे तकनीकी रूप से छ्‍पिाया जाता है। यहां भी वही मुदृा उठता है कि जब यूपी बोर्ड सीबीएसई बोर्ड आदि के मार्किंग प्रथा अलग–अलग है और जिस तरह से यूपी बोर्ड में नकल हो रहा है ऐसे में केवल मेरिट के आधार पर ग्रामीण सेवकों की भर्ती कहां तक जायज है यह लोकतांत्रिक व्‍यवस्‍था के खिलाफ है।
    अगर आप लोग इसके बारे में अधिक जानकारी चाहते है तो ग्रामीण डाक सेवा यानी जीडीएस शब्‍दावली अंग्रजी में गूगल में सर्च कराकर इसके साइट पर पहुंचा जा सकता है और वहां से चयन प्रक्रिया आदि से संबंधित जानकारी जुटाई जा सकती है। विज्ञापन किस जिले में निकला है इसके लिए उस जिले के प्रधान डाकघर में संपर्क करें। अगर इस विषय पर संपूर्ण जानकारी न मिले तो आप संबंधित अधिकारी से शिकायत कर सकते हैं।
    याद रखे कि आप अगर अपडेट रहेंगे तो ईंमानदारी से चयन होगा अगर आप लगता है कि ग्रामीण डाक सेवकों की भर्ती केवल हाईस्‍कूल के मेरिट से आज के प्रतिपर्धा और बेरोजगारी के इस युग में हो रहा है जो सही नहीं है तो न्‍यायपालिका का विकल्‍प खुला है।
    अपनी प्रतिक्रिया नीचे जरूर दे हो सकता है आपका सुझाव अनमोल हो और सभी युवाओं के लिए कारगर हो। टिप्‍पणी जरूर करें इसे आपकी सोच और योग्‍यता में निखार आता है।

    abhishek

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  14. sarkar dvara tet vigyapan radd hona tay hai ab sarkar ko prastav bhejiye ki tet qualified walon ki academic merit se bharti kar tab naya tet vifyapan nikale varna haath kuchh nahi aayega court me case chalta rahega nayi bharti hoti rahengi aur vaise bhi sab kuchh sarkar ke hi antim nirnay per tay hoga. sirf yahi ek aadhar hai jis per aap sarkar ko mana sakte hain ki humne patrata pariksha fairly paas ki hai to humara academic merit se appointment kijiye. jaanch me vaise bhi sabhi candidate doshi nahi paaye gaye hain.isi tah se ise nirst hone se roka ja sakta hai. leaders apni rai bejen.

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  15. Mr.Pankaj mind your comment. It is not easy 2 change a running process. Doors of S.C. are always open.

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  16. If cm orders 2 cancel tet,then, it is sure that tetians will knock the door of SC. Govt will surely lose.

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  17. ...then wud have 2 give jobs 2 us.Though tetians wud get salary from sp govt for 5 yrs. but they will always be against sp govt, even in elections further.

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  18. As far as i think Akhilesh understands it well and he wud not like,even in dreams that he suffers a big vote bank,slipping from his hands.

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  19. Reasons that save tet-(a)270000students passed tet and each has carbon copy of OMR sheet(b)HC favours teacher selection through tet (C)Concequences of BTC 2001

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  20. Yadi 30 april tak positive result nahi to s.c. chalo

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  21. Akhilesh ji soch lo bharti ka shrey aap loge ya coart

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  22. Akhilesh ji soch lo bharti ka shrey aap loge ya coart

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  23. Akhilesh ji soch lo bharti ka shrey aap loge ya coart

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  24. Now u understand mr. shiv

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  25. Is bharti ke sambandh me akhilesh ji dwara jo bhi nirnay liya jayega,usase ek bat to tay hai ki akhilesh ki mansikta aur u.p. Ka bhavisya kaisa hoga.

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  26. In pankaj jaise logo ko sabak sikahne k liye hi sc me pahunchna he

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  27. Ajab singh ji aapki acd. Merit kitni hai.

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  28. Abhi Kohali > Uptet
    नये फैसले से जमीन पर आ गये टीईटी के
    भाव:
    कानपुर, शिक्षा संवाददाता: शिक्षक
    पात्रता परीक्षा (टीईटी) से सीधे
    नियुक्ति न देने के शासन के फैसले से
    टीईटी के भाव जमीन पर आ गये हैं।
    जिन्होंने हाई मेरिट के चक्कर में
    लाखों खर्च कर डाले थे वे अब दुखी हैं
    वहीं दूसरे अभ्यर्थी खुश हैं।
    पिछली सरकार ने राष्ट्रीय अध्यापक
    शिक्षा परिषद के निर्देशों के विरुद्ध
    प्राथमिक
    शिक्षकों की नियुक्ति प्रक्रिया को संशोधित
    कर सीधे टीईटी की मेरिट से
    नियुक्ति देने का शासनादेश
    जारी किया था। इसे लेकर तमाम सवाल
    उठाये गये थे। शिक्षाविदों ने पुरजोर
    विरोध करते हुए स्पष्ट किया था कि जैसे
    डिग्री में नेट
    अर्हता परीक्षा मानी जाती है
    उसी प्रकार
    टीईटी को अर्हता परीक्षा ही माना जाना चाहिए।
    इसके आधार पर नियुक्ति देने से हाईस्कूल,
    इंटरमीडिएट, स्नातक व बीएड के
    प्राप्तांकों का कोई मतलब नहीं रहेगा।
    दूसरे प्रदेशों में भी टीईटी को मात्र
    अर्हता परीक्षा ही माना जा रहा है।
    कुछ छात्रों ने इसे लेकर न्यायालय में वाद
    भी दाखिल किया था।
    उधर टीईटी की मेरिट से सीधे
    नियुक्ति देने की घोषणा के साथ
    ही माफिया ने टीईटी में हाई मेरिट
    दिलाने के लिए चार लाख रुपये का रेट
    खोल दिया। इसकी आड़ में जमकर
    वसूली हुई। तत्कालीन शिक्षा निदेशक
    संजय मोहन सहित आधा दर्जन
    की गिरफ्तारी और लाखों रुपये
    की बरामदगी ने पूरी टीईटी को संदिग्ध
    कर दिया। करोड़ों का खेल सीधे
    नौकरी पाने की प्रत्याशा में हुआ। शासन
    के नये फैसले के मुताबिक अब
    टीईटी क्वालीफाई करने का मतलब
    शिक्षक पद पर
    नियुक्ति की अर्हता मात्र होगी।

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